
अमेरिका और जापान के बीच हुए व्यापार समझौते ने हलचल मचा दी है। माना जा रहा है कि इस डील में जापान को नुकसान हुआ है, क्योंकि इसमें अमेरिकी हितों को प्राथमिकता दी गई है। भारत और चीन, जिन्होंने अभी तक अमेरिका के साथ व्यापार समझौता नहीं किया है, उनके लिए जापान केस स्टडी है।
अमेरिका और जापान के बीच हुए व्यापार समझौते ने दुनिया में हलचल मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा ने साबित कर दिया है कि इस डील में जापान को बुरी तरह से ठगा गया है। जिस ‘बड़ी डील’ होने की बात की गई है, उसमें सिर्फ अमेरिका को ही फायदा दिख रहा है। इसमें जापानी आयातों पर 15% अमेरिकी टैरिफ और अमेरिका में 550 अरब डॉलर के निवेश की योजना शामिल है। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब ट्रंप प्रशासन व्यापार वार्ताओं को जल्द से जल्द पूरा करने का दबाव डालने में लगे हैं। इसके लिए 1 अगस्त की टैरिफ समय-सीमा फिक्स की गई है। इस मामले में भारत और चीन एक कश्ती पर सवार हैं। दोनों की कई मुद्दों पर अमेरिका से बातचीत फाइनल नहीं हो पाई है। डेडलाइन के बाद उन तमाम देशों पर टैरिफ की तलवार लटक रही है जिनसे समझौते नहीं हुए हैं। अमेरिका डील के बहाने दादागिरी पर उतारू है। ऐसे में भारत को बहुत ज्यादा चौकन्ना रहने की जरूरत है।
भारत और चीन दोनों ने अभी तक अमेरिका के साथ व्यापार समझौते नहीं किए हैं। इस तरह ये दोनों एक ही कश्ती पर सवार हैं। वे अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि जापान ने अमेरिका के दबाव के आगे झुककर समझौता कर लिया है। जापान के साथ अमेरिका का समझौता भारत के लिए कई महत्वपूर्ण सबक और संभावित चिंताएं पैदा करता है।
जापान कैसे भारत के लिए केस स्टडी? – ट्रंप ने पहले जापान को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि व्यापार वार्ता विफल होने की स्थिति में अमेरिका जापान पर 25% टैरिफ लगाएगा। जापान का 15% टैरिफ पर सहमत होना और 550 अरब डॉलर का निवेश करना यह दर्शाता है कि अमेरिकी दबाव की रणनीति जापान पर काम कर गई। अमेरिका ने फिलीपींस (19% टैरिफ) और इंडोनेशिया (19% टैरिफ) के साथ भी ऐसे ही समझौते किए हैं। वहां अमेरिकी उत्पादों पर कोई आयात शुल्क नहीं लगाया गया। यह भारत के लिए एक चेतावनी है कि अमेरिका भारत पर भी इसी तरह का दबाव डाल सकता है ताकि वह अपनी मांगों से पीछे हटे।
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