
नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मलाला यूसुफजई (20) अपनी पाकिस्तान यात्रा पूरी कर सोमवार को लंदन लौट गई। लड़कियों की शिक्षा की वकालत करने वाली मलाला को वर्ष 2012 में स्वात जिले में तालिबान के आतंकवादियों ने सिर में गोली मार दी थी। इस घटना के करीब छह वर्ष बाद वह पाकिस्तान आई थी। मलाला 29 मार्च को इस्लामाबाद पहुंची थी, उनका यह चार दिवसीय दौरा बेहद गुप्त रखा गया था और उनके इस्लामाबाद पहुंचने तक कुछ ही लोगों को इसकी जानकारी थी।
पाकिस्तान पहुंचकर भावुक हो गई थी मलाला
मलाला ने अपने इस दौर पर प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी से मुलाकात की थी। वहां उनके सम्मान में एक समारोह आयोजित किया गया था। मलाला ने वहां नम आंखों से कहा कि मैं पिछले पांच साल से पाकिस्तान आने का सपना देख रही थी। उन्हे वर्ष 2012 में पाकिस्तान की स्वात घाटी में लड़कियों की शिक्षा का प्रचार करने के दौरान एक आतंकवादी ने गोली मार दी थी। इस घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इस हमले के बाद तालिबान ने कहा था कि अगर मलाला जीवित बचती है तो वह उस पर दोबारा हमला किया जाएगा।
नोबेल पुरस्कार से नवाजी गई थी मलाला
मलाला को लड़कियों की शिक्षा की वकालत करने के लिए साल 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया। उन्हें भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी के साथ यह पुरस्कार दिया गया था। मात्र 17 साल की उम्र में वह नोबेल पुरस्कार हासिल करने वाली सबसे कम उम्र की पहली व्यक्ति हैं। वह ब्रिटेन में रहती हैं और वहां मलाला फंड की स्थापना करके स्थानीय शिक्षा समूहों की मदद करती हैं। मलाला ने लड़कियों की शिक्षा के लिए अपना अभियान 11 साल की उम्र में शुरू किया था। उन्होंने वर्ष 2009 में बीबीसी उर्दू सेवा के लिए ब्लॉग लिखना शुरू किया।
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