
लगभग 50 साल पहले जब मानव ने चांद पर कदम रखा था, वैज्ञानिक वहां से काफी अहम जानकारी और वहां के पत्थर और मिट्टी लाए थे। लेकिन वे काफी चीजें जैसे नील आर्म्सट्रॉन्ग के फुट प्रिंट, एक अमेरिकन झंडा और मानव अपशिष्ट के करीब 96 बैग भी वहां छोड़ आए थे। अब वैज्ञानिक चांद पर वापस जाकर दशकों पुराने मानव अपशिष्ट को वापस लाना चाहते हैं, ताकि वहां जीवन की खोज को और आगे बढ़ाया जा सके।
तब कुल 12 अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर पहुंचे थे और 96 बैग वहां छोड़कर आए थे, जिसमें उनका मल-मूत्र और अन्य कचरा था। हालांकि अंतरिक्ष यात्रियों ने स्पेस में कुद दिन से ज्यादा नहीं गुजारे हैं। नासा ने उन्हें इस तौर पर भेजा था कि वे अपने अपशिष्ट को स्पेस में छोड़ने की जरूरत न पड़े। इसके लिए नासा ने अपने अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खास तरह के कपड़े बनवाए थे, जिसमें डायपर भी था। लेकिन अंतरिक्ष यात्रियों को मजबूरी में अपना अपशिष्ट चांद की सतह पर छोड़कर आना पड़ा। दरअसल इस मिशन को इस तरह डिजाइन किया गया था कि स्पेसक्राफ्ट पर निश्चित वजन ही हो सकता था।
थोड़ा भी ज्यादा वजन होने से स्पेस क्राफ्ट और अंतरिक्ष यात्रियों की जिंदगी को खतरा था। ऐसे में वे अपने पीछे काफी गंदगी और दूसरी चीज छोड़ आए ताकि चांद की मिट्टी और चंद के पत्थरों को अपने साथ ले जा सकें। सत्ता में आने के बाद ट्रंप प्रशासन ने नासा के चांद पर जाने के प्रोग्राम में तेजी लाने का फैसला लिया और साल 2024 में फिर से चांद की सतह पर जाने की डेडलाइन तय की। वहां छोड़कर आए बैग को लाने के पीछे नासा खास मंशा है। नासा उसके जरिए वहां जीवन की खोज को आगे बढ़ाना चाहता है।
अपशिष्ट बैग लाने के ये हैं मुख्य कारण
– चांद का तापमान -170 से 156 डिग्री सेल्सियस तक होता है
– मानव का 50 प्रतिशत अपशिष्ट बैक्टिरिया से बना होता है।
– 100 से भी ज्यादा रेगाणुओं की प्रजातियां आपकी आंतों में होती हैं।
– वैज्ञानिक इस गंदगी में मौजूद बैक्टिरिया पर रिसर्च करना चाहते हैं।
– स्पेस में जीवन की कितनी संभावना है।
– मानव अपशिष्ट में क्या अब भी बैक्टिरिया मौजूद हैं?
– अपशिष्ट में बैक्टिरिया क्या फिर से ऐक्टिव हो सकते हैं ?
– यदि सभी बैक्टिरिया मर चुके हैं, तो भी उनका अध्यन्न काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।
– वैज्ञानिक जान सकते हैं कि बैक्टिरिया कितने समय तक जिंदा रहे।
– इस विश्लेषण से पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के बारे कई जानकारियां मिल सकती हैं।
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