
भारत का चंद्रयान-3 मिशन लैंड कर चुका है। ऐसा करके भारत चांद पर जाने वाला चौथा देश और दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बना है। इसरो का चंद्रयान विक्रम लैंडर के साथ लैंड हुआ। इसके अंदर प्रज्ञान रोवर था जो चांद की सतह पर चल रहा है। इसके चलने के साथ अब चांद पर भारत का अशोक स्तंभ और इसरो का लोगो छपता जा रहा है। लेकिन प्रज्ञान रोवर चांद पर अकेला नहीं है। चांद पर चीन का भी रोवर मौजूद है और सबसे खास बात की ये अभी भी एक्टिव है।
चीन का युतु-2 रोवर चंद्रमा पर चार साल बाद भी काम कर रहा है और उसने धरती पर कई तस्वीरें भेज कर वैज्ञानिकों की मदद की है। युतु-2 को चांग’ई-4 मिशन के साथ भेजा गया था। इस मिशन के जरिए चीन 2019 में चंद्रमा के पिछले हिस्से पर लैंडिंग करने वाला पहला देश बना था। चीन चांद के लिए चांग’ई मिशन चलाता है। चीनी पौराणिक कथाओं के मुताबिक चांग’ई का मतलब चांद की देवी से होता है। वहीं युतु का मतलब खरगोश है जो चांग’ई देवी के साथ चांद पर गया था।
कैसा है युतु-2 रोवर – यह रोवर वॉन कार्मन क्रेटर में है। जनवरी में आए डेटा के मुताबिक यह रोवर चार वर्षों में 1,455 मीटर तक चला था। युतु ने तब एक तस्वीर भी जारी की थी, जिसमें दिख रहा है कि वह एक क्रेटर में है। इसके साथ ही वह जहां है उस जगह एक बड़ा गड्ढा और युतु के पहियों के निशान थे। युतु-2 भी प्रज्ञान की तरह ही छह पहियों वाला है। इसका वजन 140 किग्रा है। यह रोवर भी सौर ऊर्जा से चलता है। हालांकि भारत का प्रज्ञान रोवर सिर्फ 14 दिनों तक काम करेगा।
कैसे जिंदा है चीन का रोवर – चांद पर दिन और रात 14-14 दिनों का होता है। जब चांद पर दिन होता है तो यहां का तापमान 100 डिग्री सेल्सिय से ज्यादा होता है। वहीं जब रात होती है तो तापमान माइनस 120 डिग्री से नीचे होता है, जो किसी भी मशीन की बैट्री को पूरी तरह खत्म कर सकता है। तो क्या युतु-2 पर ठंड का कोई फर्क नहीं पड़ता? इसका जवाब है कि जब चांद पर रात होती है तो यह स्लीप मोड में चला जाता है। इस दौरान इसके अंदर मौजूद रेडियो आइसोटोप हीटर यूनिट इसे ठंड में बचाता है। इसमें प्लुटोनियम 238 का इस्तेमाल किया गया है।
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