
भारत में सभी प्रकार के मांगलिक कार्य करने से पूर्व भगवान श्री गणेश जी का पूजन कार्य के विध्नों को दूर करने के लिए किया जाता है। हमारे शास्त्र साक्षी हैं कि अमंगल को हरने वाले एवं मंगल करने वाले भगवान श्री गणेश जी के पूजन के बिना कोई कार्य शुरू ही नहीं किया जाता। श्री गणेश जी को मंगल का प्रतीक माना जाता है, इसी कारण जहां श्रीगणेश विराजमान होते हैं वहां किसी प्रकार की विघ्नबाधाएं, समस्या और दोष नहीं रहते। जिस घर में श्रीगणेश जी की पूजा नियमित रूप से होती है वहां सुख-समृद्धि बरसती है तथा हर क्षेत्र में जहां लाभ पहुंचता है वहीं किसी प्रकार का कोई अभाव नहीं रहता। वास्तुशास्त्र के दोषों का निवारण भी श्रीगणेश जी की प्रतिमा की स्थापना से मिटाया जा सकता है।
कैसे मिटाएं वास्तुदोष-
गणेश प्रतिमा की स्थापना घर के द्वार के ऊपर ईशान कोण में करके अनेक वास्तुदोषों को मिटाया जा सकता है। घर का ईशान कोण ईश्वर का स्थान होता है इसलिए वहां मंदिर या पूजा स्थान बनाना अति उत्तम फल दायक है। जिस घर के मुख्य द्वार के सामने वृक्ष, मंदिर, बिजली या टैलीफोन आदि का खम्बा, कूड़ेदान अथवा कोई अन्य द्वार वेध आदि का दोष हो तो ऐसे घरों में रहने वाले लोगों को हर समय परेशानी का सामना करना पड़ता है परंतु वे घर के मुख्य द्वार के ऊपर ईशाण कोण में श्री गणेश जी की बैठी हुई प्रतिमा की स्थापना करके उसकी पूजा करें तो वास्तुदोष सहज ही में मिट जाते हैं।
ऐसी प्रतिमा का आकार 11 अंगुल से अधिक नहीं होना चाहिए तथा रविवार को पुष्य नक्षत्र में श्री गणेश प्रतिमा की स्थापना करनी चाहिए। श्री गणेश प्रतिमा की स्थापना से दरिद्रता सदा दूर रहती है जिससे घर में खुशहाली बनी रहती है। घर का उत्तरी पूर्वी कोना वास्तु पुरुष के मुख का स्थान होता है इसलिए उसकी पवित्रता और स्वच्छता अवश्य बनाए रखनी चाहिए।
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