
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए विपक्ष बड़ी तैयारी में जुटा हुआ है। दोनों सदनों के विपक्षी सांसद इस मसले पर एकजुट हैं। महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा के कम से कम 120 सांसद और राज्यसभा के 60 सांसदों ने एक नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। बताया जा रहा है कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी अभियान की अगुवाई तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक सांसद कर रहे हैं।
लोकसभा और राज्यसभा में देंगे नोटिस – पश्चिम बंगाल में आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर सत्ताधारी पार्टी चुनाव आयुक्त के खिलाफ मुखर भी है। विपक्ष एक के नेता ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि नोटिस की दो अलग-अलग कॉपी शुक्रवार तक लोकसभा और राज्यसभा में जमा की जाएंगी।
विपक्षी पार्टियां ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सात खास आरोप लिस्ट तैयार करेंगी, जिनमें “भेदभावपूर्ण व्यवहार”, “इलेक्शन फ्रॉड की जांच में जानबूझकर रुकावट डालना” और “SIR के जरिए बड़े पैमाने पर लोगों को वोट डालने के अधिकार से वंचित करना” शामिल है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया जान लीजिए – बता दें कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना संविधान के आर्टिकल 324 के तहत आता है, जिसमें कहा गया है, “…चीफ इलेक्शन कमिश्नर को सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही और उन्हीं वजहों से हटाया जाएगा…।” जजेज इंक्वायरी एक्ट के मुताबिक, “जिस सदन में नोटिस दिया जाता है, उस सदन के कम से कम सौ सदस्यों का समर्थन होना चाहिए; (b) अगर राज्यसभा में नोटिस दिया जाता है, तो राज्यसभा के कम से कम 50 मेंबर्स के समर्थन प्राप्त होने चाहिए। इसके बाद स्पीकर इस पर विचार करते हैं। यह उनका विवेकाधिकार है कि वो प्रस्ताव को मान सकते हैं या मानने से मना कर सकते हैं।”
कितनी कामयाब होगी विपक्ष की यह कवायद – अगर इस हफ्ते नोटिस दे भी दिया जाता है और उसे मान भी लिया जाता है तो बहस होने में महीनों लग सकते हैं। उस समय तक पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में चुनाव खत्म हो जाएंगे, जिनके इस गर्मी की शुरुआत में होने की उम्मीद है। इस कदम पर कमेंट करते हुए, तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा, “हमारी राजनीतिक और कानूनी लड़ाई संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह जारी रहेगी।”
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