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ईरान युद्ध पर मध्यस्थता करने चला पाकिस्तान, न रोडमैप, न ऐक्शन प्लान, एक दिन में ही खत्म हो गई विदेश मंत्रियों बैठक


पाकिस्तान ने कहा है कि वह आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत की मेजबानी कर सकता है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने रविवार को क्षेत्रीय मुस्लिम देशों के अपने समकक्षों की इस्लामाबाद में मेजबानी की। इस अहम बैठक में सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की के विदेश मंत्री पहुंचे थे, जिसमें ईरान युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करने के तरीकों पर चर्चा हुई।
बैठक के बाद इशाक डार ने कहा कि ‘संघर्ष के व्यापक और स्थायी समाधान के लिए आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच सार्थक बातचीत की मेजबानी करना और उसमें मदद करना पाकिस्तान के लिए गर्व की बात होगी।’ हालांकि, बैठक के बाद जो संकेत मिल रहे हैं, उससे ऐसा लगता है कि पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश बहुत कामयाब नहीं हो रही है।
मंत्री स्तरीय सम्मेलन समय से पहले खत्म – इसका एक अहम संकेत इस्लामाबाद में हो रहे मंत्री-स्तरीय सम्मेलन का अचानक खत्म हो जाना है। यह सम्मेलन 29 और 30 मार्च को दो दिनों के लिए तय किया गया था, लेकिन यह एक ही दिन में खत्म हो गया। इसका घोषित मकसद अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत के लिए मध्यस्थता का ढांचा तैयार करना था।
बैठक में नहीं बन पाया ऐक्शन प्लान – पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक सूत्रों की मानें तो इन रविवार को हुई मंत्री स्तरीय बैठक में कोई ठोस रोडमैप या कार्रवाई योग्य ढांचा सामने नहीं आ सका। पाकिस्तान प्रमुख क्षेत्रीय पक्षों को यह समझाने में नाकाम रहा है कि मध्यस्थता आगे कैसे बढ़ेगी। सबसे बड़ी अड़चन ईरान की तरफ से है, जिसने अभी तक बातचीत में शामिल होने की इच्छा का कोई संकेत नहीं दिया है।
मध्यस्थता पर एकमत नहीं चारों देश – बैठक में शामिल देशों ने तेहरान की मुख्य चिंताओं को दूर करने के बारे में कोई भरोसा नहीं दिलाया है। सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्री रविवार को ही इस्लामाबाद से लौट गए, जिससे शिखर सम्मेलन तय अवधि से पहले ही खत्म हो गया। क्षेत्रीय देशों के रुख में भी अंतर दिखाई दिया है। पाकिस्तान और तुर्की मध्यस्थता को लेकर उत्सुक हैं, वहीं सऊदी अरब और मिस्र सतर्क रुख अपना रहे हैं।
रियाद और काहिरा ने सुझाव दिया है कि किसी भी मध्यस्थता रोडमैप को पेश करने से पहले अमेरिका के साथ चर्चा की जानी चाहिए। पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने मेजबानी को लेकर बयान भले दिया है लेकिन असलियत यह है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच अभी तक सीधी बातचीत की पुष्टि नहीं हुई है। यह युद्ध के मैदान में होने वाले घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा, जो किसी भी बातचीत के समय और उसकी व्यावहारिकता को प्रभावित कर रहा है। दोनों पक्षों में संपर्क केवल अप्रत्यक्ष आदान-प्रदान तक ही सीमित है।
मध्यस्थता में चीन की भूमिका – पाकिस्तान को मध्यस्थता के प्रयास में किसी का समर्थन मिला है, तो वह विशेष रूप से चीन है। पाकिस्तानी राजनयिक सूत्र बताते हैं कि बीजिंग ने तेहरान को बातचीत में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया है। डार ने पिछले हफ्ते की शुरुआत में चीनी समकक्ष वांग यी से बात की थी। वे अब 31 मार्च को आगे की चर्चा के लिए बीजिंग जा रहे हैं। पाकिस्तानी अखबर डॉन ने एक राजनयिक सूत्र के हवाले से बताया कि इस यात्रा से उनकी हालिया बातचीत के आगे बढ़ाएगी। लेकिन साथ ही यह संकेत भी मिलता है कि अमेरिका-ईरान की जिस बैठक के मंगलवार को होने का अनुमान लगाया जा रहा था, अब शायद उस दिन नहीं हो पाएगी।