
हिंदू धर्म में एेसे कईं कामों के बारे में बताया है, जिनके अच्छे बुरे दोनों तरह के प्रभावों के बारे में बताया गया है। आज हम आपको वेद व्यास जी द्वारा रचित पद्मपुराण में लिखित कुछ एेसी ही बातों के बारे में बताने जा रहे हैं। कहते हैं इस पुराण के अनुसार एेसे 6 काम होते हैं, जिसे किसी को नहीं करना चाहिए, वरना अर्थ का अनर्थ हो सकता है। तो आइए जानते हैं उन कामों के बारे में।
इस पुराण के अनुसार अगर बुरा देखोगे तो बुरा करोगे। बुरा सुनना भी पाप और देखना भी पाप ही माना जाता है। क्योंकि अगर कोई बुरी संगति में रहता है तो जल्द ही वह खुद भी बुरा करना सिख जाता। इसलिए पद्मपुराण में लिखा है की इंसान की बुरी संगति से कोसों दूर रहना चाहिए।
खुद से पहले दुसरों का दुःख देखो कुछ भी बोलने से पहले सौ बार सोचो। ऐसे बाते कभी भी किसी से भी न बोलो जिससे सामने वालो को दुःख पहुंचे या बुरा लगे। हमेशा प्यार से बात करो चाहे वो मित्र हो या दुश्मन सबसे सम्मान के साथ पेश आओ और कोशिश करो कि आपकी कोई छोटी सी बात भी किसी का भी दिल न दुखाए।
जब कोई 2 लोग आपस में समझौता कर रहें हो तो तीसरे को उसे बढ़ाना नहीं बनना चाहिए। इससे हम मामला सुलझाते नहीं बल्कि और बढ़ाते हैं।
न तो किसी के बारे में बुरा बोलना चाहिए ना ही किसी से बुरा सुनना चाहिए। कहने का मतलब है कि कुछ लोगों को तीसरे आदमी की बुराई करने का शोक होता है जो कि पीठ पीछे उनके बारे में बुराइयां करते हैं ऐसे लोगों से दूर ही रहना चाहिए।
कैसे भी परिस्थिति हो इंसान को कभी गुस्से से पेश नहीं आना चाहिए। हमेशा शांति से बात करनी चाहिए। कहा गया है कि ज्यादा गुस्सा करने वाला आदमी कभी जीवन में उचा नहीं उठ पता, इसके उल्ट कामयाबी हमेशा उससे दूर ही भागती है। इसके साथ यह भी कहा गया है कि गुस्सा करने से व्यक्ति अपना सब कुछ खत्म कर सकता है। रिश्ते, प्यार, पैसे तन मन धन सब नष्ट कर देता है। इसलिए कहा जाता है कि हर किसी को अपने क्रोध यानि गुस्से पर काबू रखना चाहिए।
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