
ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले से बेहाल कतर की सरकार की अकड़ नहीं जा रही है। पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध के बीच कतर ने भारतीय नौसेना के पूर्व कमांडर पूर्णेंदु तिवारी को कतर के हाईकोर्ट ने वित्तीय गड़बड़ी के मामले में बरी कर दिया है। पूर्णेंदु तिवारी उन 8 भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों में शामिल हैं जिन्हें कथित जासूसी के मामले में अरेस्ट किया गया था। कतर के हाईकोर्ट ने 12 मार्च को दिए अपने फैसले में तिवारी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। उसने कहा कि सभी ट्रांजेक्शन शिकायतकर्ता की सहमति से किए गए थे और इसका कोई आपराधिक इरादा नहीं था। कतर की सरकार ने पीएम मोदी के हस्तक्षेप के बाद इन 8 पूर्व नौसैनिकों को क्षमा दे दिया था लेकिन अभी तक पूर्णेंदु तिवारी को रिहा नहीं किया गया है।
फर्स्ट पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्णेंदु तिवारी की मां अभी भी अपने बेटे का इंतजार कर रही हैं। तिवारी की मां का कहना है कि उन्हें कोई उम्मीद नहीं है कि उनका बेटा कब घर वापस लौटेगा। कतर की सरकार तिवारी को बरी किए जाने के बाद भी उन्हें दोहा की एक जेल में रखे हुए है। तिवारी के परिवार का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी उन्हें लगातार कानूनी और हिरासत संबंधी चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। हिरासत में रखे जाने की वजह से तिवारी का स्वास्थ्य भी लगातार खराब हो रहा है। पूर्णेंदु तिवारी के परिवार ने भारतीय अधिकारियों से अनुरोध किया है कि वे उनके स्वदेश वापसी में मदद करें।
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