
रूसी की एस-400 ट्रायम्फ को दुनिया की सबसे शक्तिशाली वायु रक्षा प्रणालियों में गिना जाता है। इजरायल का डेविड स्लिंग और अमेरिका का टीएचएएडी सिस्टम (थाड) भी बेहतरीन हैं।
भारत और पाकिस्तान के बीच बीते चार दिन (6 मई की रात से 10 मई तक) जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला है। भारत की ओर से पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर मिसाइल दागी गईं तो पाकिस्तान ने भी भारत पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले किए। इस दौरान देखा गया कि भारत के ज्यादातर हमले पाकिस्तान नहीं रोक सका। दूसरी ओर पाकिस्तान की मिसाइल और ड्रोन को भारत हवा में मार गिराने में कामयाब रहा। इसने एयर डिफेंस की ताकत को दिखाया है।
भारत की हालिया संघर्ष में पाकिस्तान पर बढ़त की वजह उसके पास बेहतर एयर डिफेंस सिस्टम के होने को माना गया है। दोनों देशों के इस संघर्ष ने एयर डिफेंस सिस्टम की महत्ता को लेकर फिर से बहस छेड़ दी है। ये पूछा जा रहा है कि किस दुनिया के किस देश के पास बेहतर एयर डिफेंस है। दुनिया के सबसे अच्छे एयर डिफेंस सिस्टम्स की जानकारी यहां हम आपको दे रहे हैं।
रूस का एयर डिफेंस सिस्टम – भारत ने रूस से S-400 डिफेंस सिस्टम खरीदा है। रूसी S-400 ट्रायम्फ सिस्टम को अल्माज सेंट्रल डिजाइन ब्यूरो ने बनाया है। S-400 को दुनिया के सबसे शक्तिशाली और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम में गिना जाता है। यह सिस्टम आधुनिक राडार, पता लगाने और निशाना लगाने वाले सिस्टम से लैस है। यह विमानों, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों के खतरों से निपट सकता है। इस सिस्टम की अधिकतम ऊंचाई 56 किलोमीटर है और 40N6 मिसाइल के साथ यह 400 किलोमीटर तक की दूरी तक मार कर सकता है। यह एक साथ 300 टागरेट ट्रैक कर सकता है।
रूस के S-300VM (NATO: SA-23) को आधुनिक एयर डिफेंस में गिना जाता है। यह रूस के S-300V का आधुनिक रूप है। इसे 250 किलोमीटर दूर तक की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए बनाया गया है। यह 9M83ME मिसाइल का इस्तेमाल करता है, जिसकी गति 7.5 मैक है। यह एक साथ 16 बैलिस्टिक लक्ष्यों या 24 विमानों को मार सकता है। रूस और वेनेजुएला इस सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं।
इजरायल का एयर डिफेंस – डेविड्स स्लिंग एयर डिफेंस सिस्टम भी मौजूदा समय की उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों में से है। इसे इजरायल के राफेल और अमेरिका के रेथियॉन ने मिलकर बनाया है। यह सिस्टम मध्यम दूरी की रॉकेटों, क्रूज मिसाइलों और बैलिस्टिक मिसाइलों को 300 किलोमीटर तक मार सकता है। इसकी रफ्तार 7.5 मैक है। इसकी स्टनर मिसाइल इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड सीकर का इस्तेमाल करती है। इससे यह असली हथियारों और नकली हथियारों के बीच अंतर कर सकती है। इजरायल ने इसे 2017 में तैनात किया था।
इजराइल का आयरन डोम 2011 से काम कर रहा है। यह कम दूरी की रॉकेटों और तोपखाने के गोलों को 90 फीसदी सफलता दर के साथ रोकता है। यह तामिर मिसाइलों (70 किलोमीटर रेंज) और ELM-2084 राडार का इस्तेमाल करता है। इसने 2021 के गाजा संघर्ष के दौरान भी अच्छा प्रदर्शन किया था। अमेरिका और रोमानिया ने भी इस सिस्टम को खरीदा है।
अमेरिका का डिफेंस सिस्टम – अमेरिका के टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) को लॉकहीड मार्टिन ने बनाया है। यह बैलिस्टिक मिसाइलों को उनके अंतिम चरण में रोकने में माहिर है। यह हिट-टू-किल तकनीक का इस्तेमाल करता है और परीक्षणों में 100 फीसदी सफल रहा है। इसकी रेंज 200 किलोमीटर और ऊंचाई 150 किलोमीटर है। इसका AN/TPY-2 रडार 1,000 किलोमीटर दूर से खतरे का पता लगा लेता है। अमेरिका ने इसे UAE और दक्षिण कोरिया में तैनात किया है।
अमेरिका का MIM-104 पैट्रियट भी एयर डिफेंस में अपनी धाक रखता है। पैट्रियट सिस्टम 1981 से काम कर रहा है। यह विमानों, क्रूज मिसाइलों और कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाता है। इसकी PAC-3 मिसाइलें 4 मैक की गति से 160 किलोमीटर दूर तक के लक्ष्यों को मार सकती हैं। यह सिस्टम ट्रैक-वाया-मिसाइल और AN/MPQ-65 रडार का इस्तेमाल करता है। इसे अमेरिका, जर्मनी, जापान और सऊदी अरब इस्तेमाल कर रहे हैं।
चीन, फ्रांस और इटली के सिस्टम – चीन का HQ-9 (Hong Qi-9) एयर डिफेंस सिस्टम रूस के S-300 से मिलता जुलता है। इसकी रेंज 200 किलोमीटर और गति 4.2 मैक है। यह 100 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और एक साथ छह जगह हमला कर सकता है। यह सिस्टम कमांड गाइडेंस और टर्मिनल होमिंग दोनों का इस्तेमाल करता है। परीक्षणों में यह 95% सटीक रहा है। इसे चीन, उज्बेकिस्तान और मोरक्को में तैनात किया गया है। यह चीन के एयर डिफेंस का मुख्य आधार है।
एस्टर-30 सिस्टम को यूरोसम ने बनाया है। यह तेज गति वाले विमानों और बैलिस्टिक मिसाइलों को 120 किलोमीटर दूर तक मार सकता है। इसकी मिसाइल की गति 4.5 मैक है। इसका राडार 100 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है। इस सिस्टम की खास बात है कि यह चारों तरफ 360 डिग्री पर घूम सकता है। फ्रांस, इटली और यूके इसका इस्तेमाल करते हैं। सिंगापुर ने भी 2023 में इसे खरीदा है।
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