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उपग्रहों की रक्षा करेंगे ‘सैटेलाइट बॉडीगार्ड’…अंतरिक्ष में भारत का बड़ा धमाका! जानें क्या है मेगा प्लान


भारत अंतरिक्ष में मौजूद अपने उपग्रहों की रक्षा के लिए एक बहुत बड़ी योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत अंतरिक्ष में उपग्रहों पर संभावित खतरा भांपते ही जमीन से उसे कक्षा में अलग जगह खिसकाने की योजना पर काम चल रहा है, जिससे दुश्मन के नापाक इरादों को नाकाम किया जा सके।
अंतरिक्ष यानों और कक्षा में चक्कर काट रहे उपग्रहों को दुश्मन के हमलों से सुरक्षित रखने के लिए भारत एक बड़ी योजना विकसित करने पर काम कर रहा है। जानकारी के मुताबिक कक्षा में एक भारतीय उपग्रह के दुश्मन के एक स्पेसक्राफ्ट से बाल-बाल बचने के बाद इस तरह की जरूरत पर ध्यान दिया गया है, क्योंकि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बहुत बड़ा खतरा उजागर हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक ‘ बॉडीगार्ड सैटेलाइट ‘एक बड़ी योजना का हिस्सा है, लेकिन इससे भविष्य में हमारे उपग्रह दुश्मनों की बुरी नजरों से सुरक्षित रखे जा सकेंगे। बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसरो के उपग्रहों ने भी हमारी सशस्त्र सेनाओं की बहुत ज्यादा सहायता की थी।
सैटेलाइट की रक्षा के लिए ‘बॉडीगार्ड’ – ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार एक ऐसा सैटेलाइट बॉडीगार्ड विकसित करना चाहती है, जो कक्षा में परिक्रमा कर रहे सैटेलाइट्स के संभावित खतरों को पहचान सके और उसकी वजह से पैदा हो रहे खतरों से निपटने में सहायता करे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मामले की जानकारी देने वाले लोगों ने इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए नाम नहीं जाहिर होने देने का आग्रह किया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी सैटेलाइट ने अहम भू्मिका निभाई थी। तब पाकिस्तान, चीन के भरोसे था।
सैटेलाइट के बाल-बाल बचने का दावा – रिपोर्ट में लोगों के हवाले से दावा किया गया है कि इसकी जरूरत तब महसूस की गई जब कथित रूप से एक पड़ोसी देश का स्पेसक्राफ्ट खतरनाक रूप से भारत के एक सैटेलाइट के करीब आ गया था। इसके मुताबिक 2024 के मध्य में बाल-बाल बचा यह सैटेलाइट भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ( ISRO ) का था। भारत के उस कथित सैटेलाइट के साथ यह घटना तब हुई, जब वह पृथ्वी से लगभग 500-600 किलोमीटर ऊंचाई पर था। अंतरिक्ष का यह क्षेत्र एलन मस्क के कम्युनिकेशन सैटेलाइट स्टारलिंक नेटवर्क की वजह से बहुत ही ज्यादा भीड़ भाड़ वाला बन चुका है।