
अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों ने बताया है कि अमेरिका के खाड़ी सहयोगी ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए आग्रह कर रहे हैं। सऊदी अरब और UAE के नेतृत्व में खाड़ी देशों का कहना है कि एक महीने तक चले बमबारी अभियान के बावजूद तेहरान पूरी तरह से कमजोर नहीं हुआ है। इन देशों का कहना है कि तेहरान के शासन को नष्ट करने का यह ऐतिहासिक मौका है।
ट्रंप की पीस डील से टेंशन में खाड़ी देश – खाड़ी देशों की तरफ यह दबाव ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लगातार यह कह रहे हैं कि ईरान जंग को खत्म करने के लिए समझौता करने को तैयार है। हालांकि, तेहरान ने इन दावों को खारिज किया है। खास बात है कि खाड़ी के इन्हीं देशों ने युद्ध शुरू करने के अमेरिका और इजरायल के फैसले पर अलग राय रखी थी। उस समय इन देशों ने निजी तौर पर शिकायत की थी कि अमेरिका और इजरायल के हमले के बारे में उन्हें पहले से पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई थी। साथ ही यह भी कहा था कि वॉशिंगटन ने क्षेत्र में होने वाले परिणामों के बारे में उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया था।
इजरायली मीडिया रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और कुवैत के अधिकारियों ने निजी बातचीत में साफ कहा है कि वे तब तक सैन्य अभियान को समाप्त नहीं करना चाहते, जब तक कि ईरान के नेतृत्व में कोई महत्वपूर्ण बदलाव न आ जाए।
ईरान के खिलाफ UAE सबसे सख्त – खाड़ी के एक राजनयिक के हवाले से कहा गया है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात तेहरान पर सैन्य दबाव बढ़ाने की मांग का नेतृत्व कर रहे हैं। इनमें UAE ने सबसे सख्त रुख अपनाया है और अमेरिका के जमीनी हमले पर जोर दे रहा है। कुवैत और बहरीन भी इस विकल्प का समर्थन करते हैं।
UAE इस संघर्ष के लंबा खिंचने से परेशान है, क्योंकि इससे बिजनेस और टूरिज्म हब के रूप में उसकी छवि को खतरा पहुंच रहा है। अमेरिका और ईरान का युद्ध शुरू होने से बाद से UAE ने 2300 से ज्यादा ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना किया है। लेकिन अबू धाबी युद्ध को ऐसी स्थिति में बंद करने के समर्थन में नहीं है, जिससे ईरान एक ताकत के रूप में बना रहे। UAE की विदेश राज्य मंत्री नौरा अल काबी ने नेशनल में एक लेख लिखर ईरान को निशाने पर लिया है।
Home / News / सऊदी अरब, UAE, बहरीन: ईरान के खिलाफ युद्ध क्यों जारी रखना चाहते हैं खाड़ी देश, ट्रंप पर बढ़ाया दबाव
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