
यमन में नौ साल से जारी संघर्ष का समाधान निकालने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के तहत सऊदी अरब के अधिकारी ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों से बातचीत के लिए रविवार को यमन की राजधानी सना पहुंचे। इस घटनाक्रम को सऊदी अरब की रणनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। सऊदी अरब यमन के हूती विद्रोहियों को आतंकवादी मानता है। यमन में साल 2015 से संघर्ष जारी है। हूती विद्रोहियों ने जब यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया, तब तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दरबू मंसूर हादी को देश छोड़कर भागना पड़ा था। बाद में सऊदी अरब समर्थित सेना ने हूती विद्रोहियों से सना को तो खाली करवा लिया गया, लेकिन अधिकतर हिस्सों पर अब भी उनका कब्जा है।
यमन की सरकार को समर्थन देता है सऊदी – यमन का पड़ोसी सऊदी अरब राष्ट्रपति हादी का समर्थन करता है। यही कारण है कि 2015 में सऊदी अरब ने कई खाड़ी देशों से गठबंधन कर यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ हवाई हमले शुरू किए थे। इनमें सऊदी अरब को संयुक्त अरब अमीरात से भी मदद मिली, लेकिन बाद में वह अलग हो गया। इसके जवाब में हूती विद्रोही भी सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले करते रहे हैं। इन हमलों में सऊदी अरब को काफी नुकसान पहुंचाया है। अमेरिका शुरू में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी का साथ दिया था, लेकिन बाइडेन प्रशासन ने अपनी नीति बदल ली और सऊदी को अकेला छोड़ दिया।
ईरान की मदद से हो रहा शांति समझौता – माना जा रहा है कि हूती विद्रोहियों के साथ बातचीत ईरान के हस्तक्षेप के काऱण हो रही है। कुछ दिनों पहले तक सऊदी अरब और ईरान कट्टर दुश्मन हुआ करते थे। सऊदी अरब दुनियाभर के सुन्नी मुसमलानों के नेता बनने का दावा करता है, वहीं ईरान शिया मुसलमानों का। इसके अलावा कूटनीतिक क्षेत्र में भी दोनों के बीच काफी तनाव था। लेकिन, चीन की मदद से दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध बहाल हो चुके हैं। इसे अमेरिका की बड़ी हार के तौर पर देखा जा रहा है।
Home / News / हूती विद्रोहियों के आगे झुक गए प्रिंस सलमान? आतंकियों से शांति वार्ता करने यमन पहुंचे सऊदी अधिकारी
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