
टीम इंडिया के पूर्व कैप्टन सुनील गावसकर (Sunil Gavaskar) ने कहा कि मैदान में दर्शकों का ना होना खिलाड़ियों को खलेगा। उन्होंने साथ ही बताया कि लॉकडाउन में स्पैनिश सीख रहे थे।
घातक कोरोना वायरस का असर क्रिकेट जगत पर भी पड़ा है और तमाम इंटरनैशनल क्रिकेट टूर्नमेंट और सीरीज फिलहाल स्थगित हैं। इस बीच दिग्गज सुनील गावसकर ने कहा कि कोरोना के बाद क्रिकेट मैच जब होंगे तो यह हर खिलाड़ी के लिए एक नई दुनिया में जीने जैसा होगा।
पूर्व भारतीय कप्तान गावसकर ने एक निजी चैनल से कहा, ‘हर खिलाड़ी के लिए यह थोड़ा मुश्किल होगा, जब वह फिर मैदान पर उतरेंगे। मुझे लगता है कि यह एक नई दुनिया में जीने जैसा होगा।’ कोरोना के कारण क्रिकेट नियमों में भी अंतरिम बदलाव किए गए हैं और गेंद पर लार लगाने पर भी बैन लगाया गया है। इस पर गावसकर ने कहा कि हर खिलाड़ी के लिए थोड़ी मुश्किल होगी।
उन्होंने कहा, ‘मैदान में दर्शकों का ना होना भी खिलाड़ियों को खलेगा। जब स्टैंड में दर्शक नजर आते हैं, कोई भी टीम खेलती है तो उसी रंग में स्टेडियम रंगा सा दिखता है। दर्शकों के ना होने से काफी खाली सा लगेगा।’
70 साल के गावसकर ने कहा, ‘युवा पीढ़ी के लिए थोड़ा बुरा लगता है। युवाओं में एक एनर्जी होती है लेकिन घर में रहकर उस एनर्जी को रोकना मुश्किल है। घर पर रहने से खिलाड़ियों को कुछ फ्रस्ट्रेशन होती है, उसका सामना करना और ऐसी स्थिति को संभालना बेहद मुश्किल है। जब मैदान पर किसी खिलाड़ी को पसीना आता है, तो उसे काफी अच्छा लगता है लेकिन वहां खेलने का मौका ना मिलना हर किसी को खलेगा।’
कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में गावसकर ने भी हाथ बढ़ाए थे और 59 लाख रुपये डोनेट किए। उन्होंने कहा कि उन्होंने भारत के लिए 35 शतक लगाए हैं और इसलिए पीएम केयर्स फंड में 35 लाख रुपये डोनेट किए। उन्होंने कहा, ‘मैं आज जो भी हूं, भारतीय क्रिकेट की वजह से हूं। इसलिए 35 शतक को देखते हुए पीएम केयर्स फंड में 35 लाख और मुंबई सीएम रिलीफ फंड में 24 लाख रुपये डोनेट किए लेकिन मेरा मानना है कि यह समुद्र में एक बूंद की तरह है।’
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