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अरावली के 100 मीटर नियम पर विवाद, कहां फंसा है पेच? ‘सर्वे ऑफ इंडिया’ किस आधार पर करेगी मैपिंग


देश में इस वक्त अरावली पहाड़ियों की ऊंचाई कम करने को लेकर विवाद जारी है। पर्यावरण मंत्रालय ने हाल ही में अरावली में खनन के लिए अनुमत क्षेत्र को और कम करने की बात कही है। लेकिन इससे ठीक एक हफ्ता पहले 17 दिसंबर को मंत्रालय ने अरावली की एक नई, 100 मीटर की परिभाषा को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया था। इस नई परिभाषा को लेकर चारों ओर से विरोध हो रहा है। मंत्रालय ने सर्वे ऑफ इंडिया को इसी परिभाषा के आधार पर अरावली की पहाड़ियों का नक्शा बनाने का निर्देश दिया है।
यह नई परिभाषा मंत्रालय की एक तकनीकी समिति ने प्रस्तावित की थी और सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को खनन के उद्देश्य से इसे स्वीकार कर लिया था। इस परिभाषा के अनुसार, केवल वही भू-भाग अरावली की पहाड़ी माना जाएगा जो सबसे निचले स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचा हो। और अगर ऐसी पहाड़ियां 500 मीटर के दायरे में हों, तो उन्हें एक रेंज (श्रृंखला) माना जाएगा।