
अमेरिकी-इजरायली हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर सरकार की चुप्पी को लेकर कांग्रेस लगातार हमलावर है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि उसका यह रुख भारत की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह पैदा करता है।
सोनिया गांधी के इस बयान के बाद अब कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने मंगलवार को सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, भारत की जो विदेश नीति रही है, मौजूदा सरकार ने उस विदेश नीति के परखच्चे उड़ा दिए। अल्वी ने कहा, पीएम मोदी सऊदी और यूएई के शासक से बात कर रहे हैं लेकिन ईरान के नेता से बात नहीं कर रहे हैं।
‘पीएम मोदी के मशवरे पर ही ईरान पर जंग हुई’ – कांग्रेस नेता ने पीएम मोदी के इजरायल दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा, प्रधानमंत्री इजरायल गए थे और ऐसे मौके पर गए थे कि देश के लोगों के शक है कि प्रधानमंत्री के मशवरे पर ही ईरान पर जंग हुई है। प्रधानमंत्री को देश को बताना चाहिए कि इस पर नेतन्याहू के साथ उनकी क्या बात हुई। उन्होंने कहा, यही कारण है कि वो खामोश है, उनकी चुप्पी है। क्योंकि उन्हें सबकुछ मालूम था।
भारत की जो विदेश नीति रही है, मौजूदा सरकार ने उस विदेश नीति के परखच्चे उड़ा दिए। प्रधानमंत्री इजरायल गए थे और ऐसे मौके पर गए थे कि देश के लोगों के शक है कि प्रधानमंत्री के मशवरे पर ही ईरान पर जंग हुई है। प्रधानमंत्री को देश को बताना चाहिए कि इसपर नेतन्याहू के साथ उनकी क्या बात हुई।
‘सबको पता तो पीएम मोदी को क्यों नहीं?’ – राशिद अल्वी ने कहा, इजरायल के अंदर शोर मचा था कि भारत के प्रधानमंत्री के जाते ही इजरायल ईरान पर हमला कर देगा। उन्होंने कहा, जब वहां एक-एक व्यक्ति को मालूम था तो ऐसा कैसे हो सकता है कि पीएम मोदी को न मालूम हो।
सोनिया गांधी ने अपने लेख में क्या कहा? – सोनिया गांधी ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की ‘‘लक्षित हत्या’’ पर मोदी सरकार की चुप्पी को लेकर कहा कि उसका यह रुख भारत की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह पैदा करता है।
सोनिया ने अपने लेख में यह भी कहा कि आगामी नौ मार्च से जब संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की बैठक शुरू हो तो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के भंग होने पर सरकार की परेशान करने वाली चुप्पी’’ पर स्पष्ट चर्चा होनी चाहिए।
सोनिया गांधी ने कहा, जारी कूटनीतिक वार्ता के बीच किसी पदासीन राष्ट्राध्यक्ष की हत्या समकालीन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक भयावह विघटन का संकेत है। लेकिन इस स्तब्ध कर देने वाली घटना से परे नयी दिल्ली की चुप्पी भी हैरान करने वाली है।
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा, अमेरिका-इजरायल के व्यापक हमले की अनदेखी करते हुए, प्रधानमंत्री ने केवल ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात पर किए गए प्रतिशोधी हमले की निंदा तक स्वयं को सीमित रखा और उससे पहले के घटनाक्रमों का उल्लेख नहीं किया। बाद में उन्होंने ‘‘गहरी चिंता’’ व्यक्त की और ‘‘संवाद और कूटनीति’’ की बात की, जबकि यही प्रक्रिया इजराइल और अमेरिका द्वारा किए गए व्यापक, अकारण हमलों से पहले जारी थी।
उन्होंने कहा, जब किसी विदेशी नेता की लक्षित हत्या पर हमारा देश संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून की स्पष्ट रक्षा नहीं करता और निष्पक्षता त्याग दी जाती है, तो यह हमारी विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। मौन रहना तटस्थता नहीं है।
सोनिया गांधी ने कहा कि ईरानी नेता की हत्या बिना किसी औपचारिक युद्ध घोषणा के और चल रही राजनयिक प्रक्रिया के दौरान की गई।
सोनिया ने कहा, समय की दृष्टि से भी यह असहज करने वाला है। हत्या से मात्र 48 घंटे पहले प्रधानमंत्री इज़राइल की यात्रा से लौटे थे, जहां उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के प्रति स्पष्ट समर्थन दोहराया, जबकि गाजा संघर्ष में बड़ी संख्या में नागरिको, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की मौतों पर वैश्विक आक्रोश बना हुआ है।
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