
अमेरिका F-16 अपग्रेडेशन पैकेज में पाकिस्तान को लिंक 22 नहीं देगा। लिंक 22 एफ-16 लड़ाकू विमान का टेक्टिकट डेटा लिंक होता है, जिससे पायलटों को युद्धक्षेत्र के हालात की जानकारी मिलती है। इससे पायलट बेहतर निर्णय ले पाता है और सूचनाओं का आसानी से और सुरक्षित आदान-प्रदान भी करता है।
अमेरिका ने पाकिस्तान के पुराने F-16 फाइटर जेट बेड़े को अपग्रेड करने के लिए 989 मिलियन डॉलर के पैकेज को मंजूरी दी है। 8 दिसंबर 2025 को डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) की ओर से कांग्रेस को एक औपचारिक नोटिफिकेशन के जरिए घोषित इस डील में अत्याधुनिक एवियोनिक्स, सुरक्षित कम्युनिकेशन सिस्टम और व्यापक सस्टेनमेंट सपोर्ट शामिल है। इस अपग्रेडेशन के जरिए पाकिस्तानी वायुसेना के इन लड़ाकू विमानों को 2040 के दशक तक ऑपरेशनल रखे जाने की उम्मीद है। हालांकि, इसमें F-16 के लिए लिंक 22 सॉप्टवेयर शामिल नहीं है। अमेरिका को डर है कि पाकिस्तान से इसकी तकनीक चीन के हाल लग सकती है।
लिंक 22 नहीं देगा अमेरिका – पाकिस्तानी F-16 अपग्रेडेशन पैकेज दो मुख्य हिस्सों में बंटा है: “प्रमुख रक्षा उपकरणों” के लिए 37 मिलियन डॉलर और सॉफ्टवेयर में बदलाव, ट्रेनिंग प्रोग्राम और लॉजिस्टिकल बैकबोन जैसी छोटी-मोटी चीजों के लिए 649 मिलियन डॉलर। अपग्रेड प्रोग्राम के केंद्र में 92 लिंक-16 टैक्टिकल डेटा लिंक सिस्टम का एक बैच भी शामिल है। पहले ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि अमेरिका F-16 लड़ाकू विमान के लिए पाकिस्तान को टैक्टिकल डेटा लिंक, लिंक 22 दे सकता है, लेकिन नए पैकेज में इसका जिक्र नहीं है।
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