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ईरान और UAE में जंग का खतरा, भारत ने भेजा ब्रिक्‍स सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने का न्‍योता, तेहरान ने बढ़ाई चुनौती


अमेरिका के मरीन कमांडो बड़े पैमाने पर खाड़ी देशों में पहुंच रहे हैं। इस बात के आसार बन रहे हैं कि अमेरिका कोई बड़ा जमीनी हमला ईरान में कर सकता है। इस बीच ईरानी सूत्रों ने कहा है कि संयुक्‍त अरब अमीरात अमेरिका इजरायल युद्ध में सक्रिय रूप से भूमिका निभा रहा है। उसने कहा कि अमेरिका कोई जमीनी सेना भेजता है तो उसके जवाब में यूएई में व्‍यापक हमला करके जवाब दिया जाएगा। अमेरिका स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने के लिए जमीनी हमले के विकल्‍प पर भी व‍िचार कर रहा है जिसके बंद होने से यूएई, भारत समेत पूरी दुनिया को बहुत दिक्‍कत हो रही है। अमेरिका ने जब से ईरान पर हमला किया है, तब से तेहरान ने सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन हमले यूएई और सऊदी अरब पर किए हैं। इससे इन देशों के बीच में जंग जैसे हालात हैं। इस बीच भारत ने इन तीनों ही ब्रिक्‍स के सदस्‍य देशों को सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने के लिए न्‍योता भेजा है।
ईरान लगातार भारत से मांग कर रहाहै कि भारत ब्रिक्‍स के मंच से ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले की निंदा करे। भारत इस समय ब्रिक्‍स का अध्‍यक्ष है। भारत ने अभी तक ईरान की इस मांग को स्‍वीकार करने से परहेज किया है। इसकी वजह यह है कि ईरान ब्रिक्‍स के दो सदस्‍य देशों यूएई और सऊदी अरब पर भी हमले कर रहा है। ये दोनों भी भारत के करीबी दोस्‍त हैं। भारत ने अभी भारत ने ब्रिक्‍स के सदस्‍य देशों को मई महीने में होने वाली विदेश मंत्रियों की बैठक और सितंबर में होने वाले 18वें ब्रिक्‍स शिखर सम्‍मेलन के लिए न्‍योता भेजा है।
ईरान और यूएई के रुख ने भारत को मुश्किल में डाला – भारत को उम्‍मीद है कि ब्रिक्‍स की इन बैठकों से पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को खत्‍म करने को लेकर सहमति बनेगी। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि अभी यह स्‍पष्‍ट नहीं है कि यूएई और ईरान एक साथ इस बैठक में हिस्‍सा लेंगे या नहीं। हालांकि यह बैठक वर्चुअल नहीं होगी तो ऐसे में इन नेताओं को अगर शामिल होना है तो भारत आना होगा। वहीं सिंतबर में होने वाली ब्रिक्‍स शिखर सम्‍मेलन में रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन, चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग और अन्‍य सदस्‍य देशों के शीर्ष नेता हिस्‍सा लेंगे। यह 9 से 10 सितंबर के बीच होना है।