
होली सबसे कलरफुल फेस्टिवल है। इस दिन हर किसी पर लाल, पीला, हरा गुलाल चढ़ा दिखाई देता है। लेकिन यह रंग आपकी आंखों के अंदर जाने पर नुकसान कर सकता है। इससे आई इंफेक्शन, कंजंक्टिवाइटिस और आंखों में जलन की समस्या हो सकती है। होली पर अपनी आंखों को सुरक्षित रखने के लिए आपको कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। जिसमें चश्मा पहनना, आंखों को ना रगड़ना जैसी एहतियात शामिल है।
होली के बाद हमारे पास आंखों की समस्या लेकर आने वाले मरीजों की संख्या काफी बढ़ जाती है। आई स्पेशलिस्ट के रूप में मैं सभी लोगों को होली पर प्रोटेक्टिव आई ग्लासेस पहनने की सलाह देती हूं। अगर आपकी आंखों में रंग चला जाए तो उन्हें रगड़ना या मसलना नहीं चाहिए, बल्कि साफ पानी से धोना चाहिए। ऐसी कुछ सावधानियां बरतकर रंगों के त्योहार का जमकर आनंद उठा सकते हैं।
बाजार में बिकने वाले सिंथेटिक रंगों में केमिकल्स मौजूद होते हैं। इन केमिकल्स के आंखों के अंदर जाने के बाद आंखों में जलन, एलर्जी, लालिमा और आई इंफेक्शन हो सकता है। इसलिए होली खेलते वक्त आंखों की सुरक्षा पर खास ध्यान देना महत्वपूर्ण है। रंगों के महीन कण आंखों की सेंसिटिव सतह को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
गुलाल और वॉटर कलर दोनों से खतरा – गुलाल और वॉटर कलर दोनों ही आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। खासकर तेज और गहरे रंग में सिंथेटिक पिगमेंट होता है, जो कॉर्निया को प्रभावित कर सकता है। कई बार देखा जाता है कि आंखों के अंदर रंग जाने पर लोग आंखों को मसलने लगते हैं। इससे समस्या बढ़ जाती है और आंखों में खरोंच तक आ सकती है।
हल्के में ना लें यह स्थिति – होली खेलते हुए आंखों के अंदर रंग जाना एक सामान्य दिक्कत है, लेकिन इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर आंखों में रंग चला जाए तो इसे रगड़ने से भी बचना चाहिए और तुरंत साफ पानी से धोना चाहिए।
आंखों को क्यों होता है खतरा? – दिमाग में एक सवाल आ सकता है कि रंग तो हमारी स्किन पर भी लगता है, लेकिन आंखों को नुकसान क्यों होता है? इसकी वजह आंखों की बाहरी परत है। यह बहुत नाजुक और संवेदनशील होती है। इसलिए थोड़े-से भी केमिकल एक्सपोजर से जलन और एलर्जी होने लगती है। अगर रंग आंखों के अंदर लंबे समय तक रह जाए तो कंजंक्टिवाइटिस, सूजन या धुंधला दिखने जैसी दिक्कतें हो सकती है। अगर आप कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं तो ज्यादा सावधान रहें। क्योंकि रंग लेंस में फंस सकता है और इन समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
आई सेफ्टी के लिए सलाह – प्रोटेक्टिव आई ग्लासेस या सनग्लासेस पहनें – होली खेलते हुए चश्मा पहनना केवल स्टाइल नहीं है, यह रंगों को भी आंखों में अंदर जाने से रोकता है।
आंखों को ना रगड़ें – अगर आंख के अंदर रंग चला जाए तो रगड़ने से कॉर्निया पर खरोंच आ सकती है।
तुरंत साफ पानी से धोएं – आंखों के अंदर रंग जाने पर 10-15 मिनट तक साफ पानी से धीरे-धीरे आंख को धोना चाहिए।
कॉन्टैक्ट लेंस से बचें – होली के दिन लेंस की जगह चश्मा पहनना चाहिए। यह तरीका आंखों के लिए ज्यादा सुरक्षित है।
तेज केमिकल वाले रंगों से दूरी बनाएं – सिंथेटिक कलर के मुकाबले हर्बल और ऑर्गेनिक रंग आंखों के लिए ज्यादा सुरक्षित होते हैं।
दिक्कत होने पर डॉक्टर से मिलें – अगर आंखों में तेज जलन, दर्द, धुंधलापन या लालिमा लगातार बनी हुई है तो तुरंत आई स्पेशलिस्ट से जांच करवाएं। बिना डॉक्टरी सलाह के घरेलू उपाय आजमाने से इंफेक्शन बढ़ सकता है।
बच्चों और बुजुर्गों का ज्यादा रखें ध्यान – वयस्कों के मुकाबले बच्चों की आंखें अधिक सेंसिटिव होती हैं। इसलिए उन्हें सिंथेटिक रंगों से बिल्कुल दूर रखना चाहिए। साथ ही उन पर ध्यान रखें कि वो होली किस तरह मना रहे हैं। बुजुर्गों की आंखें कमजोर होती हैं और उन्हें पहले से आंख की कोई समस्या भी हो सकती है। ऐसे में उनकी आंखों में रंग जाने से तकलीफ बढ़ सकती है। थोड़ी सी जागरुकता और सही सावधानी अपनाकर होली को आंखों के लिए सुरक्षित बनाया जा सकता है। प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल और सुरक्षात्मक कदम उठाना ही आंखों की सेहत को बनाए रखने का सबसे आसान तरीका है।
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