
साल 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों में अपने माता-पिता को खोने वाले इजरायली किशोर मोशे होल्ट्जबर्ग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद से निपटने के रास्ते तलाशने का अनुरोध किया है। वह चाहते हैं कि जो ‘उन पर गुजरी है, वह किसी और पर न गुजरे।’ 26/11 हमलों के समय दो साल के रहे मोशे अब 16 साल के हो चुके हैं। वह हमले में बचे सबसे युवा व्यक्ति हैं। हमले के दौरान वह और उनकी भारतीय आया सैंड्रा मुंबई में नरीमन हाउस में घिर गए थे, जिसे ‘चाबाड़ हाउस’ के नाम से भी जाना जाता है।
इस दौरान मोशे को सीने से लगाए हुए सैंड्रा की तस्वीर ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया था। पाकिस्तान में स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों के इन हमलों में मोशे के पिता रब्बी गैब्रिएल होल्ट्जबर्ग और रिवका होल्ट्जबर्ग की मौत हो गई थी। मोशे के माता-पिता मुंबई में चाबाड़ आंदोलन के दूत थे। परिवार ने गुरुवार को हिब्रू कैलेंडर के अनुसार यरूशलम में एक कब्रिस्तान में अपने प्रियजन की याद में प्रार्थना की।
‘मुझ पर जो गुजरी, वह किसी और पर न गुजरे’ – मोशे के परिवार ने हाल ही में एक रिकॉर्डेड संदेश ‘पीटीआई-भाषा’ को साझा किया, जिसमें मोशे को अपनी आया सैंड्रा के साहस के बारे में बताते हुए सुना जा सकता है, जिसकी वजह से वह जिंदा बच पाए। मोशे ने कहा कि उनकी जान बचाने के लिए उसने खुद अपनी जान जोखिम में डाल दी। संदेश के अंत में मोशे ने विनम्र अपील की कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कदम उठाने चाहिए ताकि ‘उनपर जो गुजरी है, वह किसी पर न गुजरे।’
‘राजनीतिक कारणों से रोके गए भारत के प्रयास’ – उल्लेखनीय है कि 26 नवंबर 2008 को मुंबई में विभिन्न स्थान पर हुए आतंकवादी हमलों में 166 लोगों की मौत हो गई थी। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि और राजदूत रुचिरा कंबोज ने कहा कि 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों के दोषियों और मददगारों पर प्रतिबंध लगाने के भारतीय प्रयास ‘राजनीतिक कारणों’ से रोके गए, जिसकी वजह से वे व्यक्ति आजाद घूमते रहे और आगे भी देश के खिलाफ सीमा पार से हमले करते रहे। उन्होंने कहा कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक ‘गंभीर खतरा’ बना हुआ है।
Home / News / मुझ पर जो गुजरी, वह किसी और पर न गुजरे… 26/11 हमले में सिर्फ दो साल के थे मोशे, आया ने बचाई थी जान
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