
संसद के बजट सत्र का पहला चरण भारत-यूएस ट्रेड डील को लेकर काफी हंगामेदार रहा है। विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। अब बजट सत्र के दूसरे सत्र के शुरू होने से पहले बीजेपी ने ठक्कर आयोग की रिपोर्ट को लेकर सवाल उठाया है और पूर्व पीएम राजीव गांधी को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है।
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने गुरुवार को सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, क्या आपको पता है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या का रहस्य क्या है? उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व पीएम राजीव गांधी ने ठक्कर आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करने की जिद की और इसी चक्कर में 1989 में विपक्ष के 63 सांसदों को लोकसभा से निलंबित कर दिया गया था।
बेटे ने क्यों की मां के हत्यारों को बचाने की कोशिश? – निशिकांत दुबे ने तत्कालीन राजीव गांधी सरकार द्वारा ठक्कर आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक न करने पर सवाल उठाते हुए कहा, एक बेटा, मां के हत्यारों को बचाने की कोशिश क्यों कर रहा था?
क्या है आयोग आयोग? – 31 अक्टूबर 1984 को भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके दो सुरक्षागार्ड बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। प्रधानमंत्री की हत्या के बाद इस मामले की जांच के लिए ठक्कर आयोग को गठित किया गया था। इस आयोग का नेतृत्व न्यायमूर्ति एम.पी. ठक्कर कर रहे थे। इस आयोग ने सुरक्षा खामियों, मेडिकल स्टाफ की लापरवाही और हत्या में विदेशी एजेंसी या आंतरिक साजिश की जांच की थी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग की इस रिपोर्ट में कई गंभीर खामियों की ओर इशारा किया गया था। रिपोर्ट में इंदिरा गांधी के सहयोगी रहे आरके धवन की भूमिका भी संदिग्ध रही थी। हालांकि सरकार ने बाद में इसे खारिज कर दिया था।
क्या है 63 सांसदों के निलंबन का मामला? – 1989 में बीजेपी के कई सांसदों ने राजीव गांधी सरकार से मांग की कि ठक्कर आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। रिपोर्ट पेश करने को लेकर कई सांसदों ने जबरदस्त हंगामा किया। जिसके बाद एकसाथ लोकसभा के 63 सांसदों को निलंबित कर दिया गया।
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