
दिल्ली की यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण के कारण और इसे स्वच्छ बनाने के प्रयासों पर रिपोर्ट। यमुना नदी के प्रदूषण स्तर को कम करने के लिए 2017-2021 के बीच 6500 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन अनऑथराइज्ड कॉलोनियों से निकलने वाले सेप्टेज और सीवेज सिस्टम की कमी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
करोड़ों खर्च करने के बाद भी दिल्ली में यमुना सबसे अधिक प्रदूषित क्यों हैं? सीएसई (सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट) के AAD (अनिल अग्रवाल डायलॉग) में सीएसई की वॉटर एंड वेस्ट वॉटर की सीनियर प्रोग्राम मैनेजर सुष्मिता सेनगुप्ता ने इस पर एक प्रेजेंटेशन दिया।
उन्होंने कहा, दिल्ली में कितना गंदा पानी निकल रहा है, यह महज अंदाजे पर आधारित है। ऐसे में यमुना कैसे साफ होगी? फॉर्म्युले के अनुसार जितना पानी सप्लाई हो रहा है, उसका 80 प्रतिशत पानी वेस्ट वॉटर माना जाता है। पानी सप्लाई आबादी के आधार पर कैलकुलेट होती है, लेकिन मौजूदा आबादी कितनी है? उसकी सही जानकारी नहीं है। दिल्ली में यमुना 22 किलोमीटर हिस्से में बहती है। यह पूरी यमुना का महज दो प्रतिशत है और यमुना का सबसे प्रदूषित हिस्सा है।
लोकसभा में दिए गए एक सवाल के जवाब में बताया गया था कि 2017-2021 के बीच दिल्ली में यमुना की सफाई पर 6500 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 2024 में राजधानी में 3600 एमएलडी सीवेज जनरेट होता हो रहा था, जबकि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 3033 है। एसटीपी का इस्तेमाल 2574 एमएलडी सीवेज को ट्रीट करने में हो रहा है। यमुना में छोड़ने से पहले ही 71 प्रतिशत वेस्ट वॉटर को ट्रीट कर लिया जाता है। मार्च 2025 तक इसकी क्षमता 550 एमएलडी और बढ़ाने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि 14 एसटीपी ही डीपीसीसी और सीपीसीबी के स्टैंडर्ड पर पानी को ट्रीट कर पा रहे हैं। इंटरसेप्टर सीवर प्रोजेक्ट में भी 108 ड्रेन को सीधे यमुना में गिरने से रोकने का काम किया जाना है। वहीं, 22 बड़े नालों में 9 को यमुना में गिरने से रोका जा चुका है। दो नाले दिल्ली गेट और सेन नर्सिंग होम आंशिक रूप से अब भी यमुना में गंदगी लेकर जा रहे हैं।
क्या कहती है रिपोर्ट? – रिपोर्ट के अनुसार, एक दिन में औसत 1.5 मिलियन लीटर सेप्टेज कलेक्ट और ट्रीट होता है। सुष्मिता ने बताया कि 2021-22 के इकोनॉमिक सर्वे में दिल्ली की 30 प्रतिशत आबादी अनऑथराइज्ड कॉलोनियों में रहती हैं। यहां के टॉयलेट सीवर सिस्टम से कनेक्ट नहीं हैं। इन्हें टैंकर खाली करते हैं और फिर उन्हें पैसे बचाने के लिए खुले नालों में डाल देते हैं। यह नाले सीधे यमुना में गिरते हैं।
कैसे साफ होगी यमुना – ट्रीटेट पानी को नालों में बहाने की बजाय रियूज और रिसाइकल करें।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नदी के पास है, तभी उसे सीधे नदी में छोड़ा जाए।
सिर्फ 331 एमएलडी ट्रीटेड वॉटर का इस्तेमाल हो रहा है। इसे बढ़ाया जाए।
इसका इस्तेमाल खेती, बागवानी, इंडस्ट्री, झीलों को रिवाइव करने में हो।
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