
बांग्लादेश के आम चुनाव में पाकिस्तान समर्थक कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी को मुंह की खानी पड़ी है। उसका सरकार बनाने का सपना टूट गया है। हालांकि, चुनाव में 70 से ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद जमाते-इस्लामी खुद को मजबूत विपक्ष के रूप में रख सकती है और सरकार पर भारत से मजबूत रिश्ते बनाने की राह में बड़ा रोड़ा बन सकती है।
बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार अभी तक पाकिस्तान और चीन से करीबी बढ़ा रही थी। एक तरफ जहां बांग्लादेश में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का ठिकाना बन रहा था, वहीं, चीन से सैन्य ड्रोन का करार भी कर डाला था। यूनुस सरकार ने भारत को चिकननेक पर धमकी तक दे डाली थी।
बांग्लादेश की जनता ने जमात को नहीं दी सत्ता – द इकनॉमिक टाइम्स की एक खबर के अनुसार, जमात ने बांग्लादेश चुनाव के दौरान अल्पसंख्यकों पर फोकस किया था और भारत विरोधी गतिविधियों में लगीं कट्टरपंथी ताकतों को खूब बढ़ावा दिया था।
सड़कों पर भारी प्रदर्शनों के बावजूद बांग्लादेश की जनता ने चुनावों में जमात को नकार दिया। जनता ने कट्टरपंथ की जगह बांग्लादेश पर फोकस करने वाली पार्टी को जितवाया। तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी (BNP) ने दो-तिहाई बहुमत से जीत दर्ज की।
शेख हसीना की अवामी लीग के वोटों पर थी नजर – चुनाव के दौरान जमात को ये भरोसा था कि बांग्लादेश से भागकर भारत रह रहीं शेख हसीना की अवामी लीग के वोटरों को वो साध लेगी, मगर ऐसा नहीं हो पाया। जमात को यह उम्मीद थी कि उसे महिलाओं और युवाओं का खूब समर्थन मिलेगा, मगर यह भी नहीं हो पाया। ये वही जमात है, जिसने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के खिलाफ पाकिस्तान की दमन की कार्रवाई का समर्थन किया था।
पीएम नरेंद्र मोदी की एक पोस्ट बड़ा संकेत – डिफेंस एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) जेएस सोढ़ी कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी की सुबह 9 बजे बीएनपी को चुनाव में बढ़त मिलने के बाद बधाई देते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा-यह जीत बांग्लादेश की जनता के आपके नेतृत्व पर जताए गए भरोसे को दिखाती है।
Home / Uncategorized / बांग्लादेश को चीन-पाकिस्तान की गोद से उतार पाएगा भारत? क्या खत्म होगा जमात का जोखिम!
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