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अरुणाचल पर टेढ़ी नजर, पाकिस्तान में आर्मी बेस और हथियार की सप्लाई, भारत का दुश्मन नंबर-1 चीन!


चीन ने पाकिस्तान को भी लगातार हथियार देकर भारत को दक्षिण एशिया में उलझाने की कोशिश की है। चीन की टेड़ी नजर अरुणाचल प्रदेश पर भी बनी हुई है। चालाक चीन भारत को दोतरफा घेरने की कोशिश कर रहा है।
अमेरिकी रक्षा विभाग की एक नई रिपोर्ट ने चीन की भारत के खिलाफ की जा रही साजिशों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अब भारत के अरुणाचल प्रदेश पर उसी तरह नजर गड़ाए हुए है, जैसे वह ताइवान और दक्षिण व पूर्वी चीन सागर के इलाकों पर रखता है। यह सब चीन की ‘महान कायाकल्प’ की रणनीति का हिस्सा है। साथ ही, चीन लगातार पाकिस्तान को अत्याधुनिक सैन्य हथियार भी दे रहा है, जैसे कि मल्टीरोल J-10C फाइटर जेट।
पेंटागन की यह वार्षिक रिपोर्ट चीन की सैन्य ताकतों के बारे में है। इसमें कहा गया है कि चीन के नेताओं ने ‘मुख्य हित’ (core interest) शब्द का दायरा बढ़ा दिया है। अब इसमें ताइवान और दक्षिण चीन सागर, सेनकाकू द्वीप समूह और भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावे भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-मई 2020 में चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने पश्चिमी सेक्टर में पूर्वी लद्दाख में कई बार घुसपैठ की थी। इसके बाद से चीन ने भारत के पूर्वी सेक्टर (सिक्किम, अरुणाचल) में भी अपनी हरकतें बढ़ा दी हैं।
हालांकि, पिछले साल अक्टूबर में भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख के दो बचे हुए जगहों, देपसांग और डेमचोक, से सैनिकों की वापसी हो गई थी। लेकिन जमीनी हकीकत में कोई कमी नहीं आई है। दोनों देशों की सेनाएं लगातार छठे सर्दियों में भी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास आमने-सामने तैनात हैं। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि अरुणाचल, खासकर तवांग इलाका, जिसे चीन ‘दक्षिण तिब्बत’ कहता है, ‘बहुत अच्छी तरह से सुरक्षित’ है। यहां सैनिकों और हथियारों की बहुत ज्यादा संख्या है ताकि किसी भी खतरे का सामना किया जा सके।
कैसे चालाकी कर रहा चीन? – भारत और चीन के बीच संबंधों में आई नरमी को देखते हुए, पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन शायद LAC पर तनाव कम होने का फायदा उठाना चाहता है। इसका मकसद द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करना और अमेरिका-भारत के बीच बढ़ती दोस्ती को रोकना है। यह बात पिछले साल अक्टूबर में BRICS सम्मेलन के मौके पर मोदी और शी की मुलाकात के बाद कही गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ‘हालांकि, भारत शायद चीन के कामों और इरादों पर शक कर रहा है।’ आपसी अविश्वास और अन्य मुद्दे दोनों देशों के रिश्तों को सीमित कर रहे हैं।
परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ा रहा चीन – यह रिपोर्ट मुख्य रूप से चीन की तेज और खतरनाक सैन्य क्षमता के विकास पर केंद्रित है। चीन ने जमीन, हवा, समुद्र, अंतरिक्ष, साइबरस्पेस और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे सभी क्षेत्रों में अपनी ताकत बढ़ाई है। उदाहरण के लिए, PLA ने अपने परमाणु हथियारों का ‘बड़े पैमाने पर विस्तार’ जारी रखा है। चीन 2030 तक 1,000 से ज्यादा परमाणु हथियार रखने की राह पर है, जबकि अभी उसके पास लगभग 600 हैं। इसके अलावा, चीन 2035 तक अपने तीन मौजूदा विमान वाहक पोतों के अलावा 6 और विमान वाहक पोत बनाने की योजना बना रहा है।
चीन ने पाकिस्तान को भी लगातार हथियार देकर भारत को दक्षिण एशिया में उलझाने की कोशिश की है। इस साल मई तक, चीन ने पाकिस्तान को 36 J-10C फाइटर जेट दिए हैं। इससे पहले भी चार 054A/P मल्टी-रोल फ्रिगेट और अन्य सैन्य उपकरण दिए जा चुके हैं। पाकिस्तान ने मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना (IAF) के खिलाफ चीनी J-10 विमानों का इस्तेमाल किया था। ये विमान PL-15 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस थे और पूरी तरह से नेटवर्क से जुड़े हुए थे।
पाकिस्तान के साथ मिलकर साजिश कर रहा चीन – पेंटागन की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, चीन पाकिस्तान में एक सैन्य अड्डा स्थापित करने पर विचार कर रहा है। यह रिपोर्ट मंगलवार को अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई थी। रिपोर्ट में चीन और पाकिस्तान के बीच रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग पर भी प्रकाश डाला गया है। पेंटागन का मानना है कि चीन अपनी नौसैनिक और हवाई शक्ति का विस्तार करने के लिए ऐसी अतिरिक्त सैन्य सुविधाओं की योजना बना रहा है।
अमेरिकी युद्ध विभाग की वार्षिक रिपोर्ट, ‘मिलिट्री एंड सिक्योरिटी डेवलपमेंट्स इन्वॉल्विंग द पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना 2025’ में यह जानकारी सामने आई है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) नई सैन्य सुविधाओं की योजना बना रही है और उन पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है। इन सुविधाओं से चीन अपनी नौसेना और वायु सेना की ताकत बढ़ा सकेगा। साथ ही, जमीनी सुरक्षा बल भी वहां तैनात किए जा सकेंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान उन देशों में से एक है जहां चीन संभवतः अपना अड्डा स्थापित करने पर विचार कर रहा है। यह कोई अकेली जगह नहीं है जहां चीन ने ऐसी योजना बनाई है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘चीन ने संभवतः अंगोला, बांग्लादेश, बर्मा, क्यूबा, इक्वेटोरियल गिनी, इंडोनेशिया, केन्या, मोजाम्बिक, नामीबिया, नाइजीरिया, पाकिस्तान, पापुआ न्यू गिनी, सेशेल्स, सोलोमन द्वीप, श्रीलंका, ताजिकिस्तान, थाईलैंड, तंजानिया, संयुक्त अरब अमीरात और वानुअतु में भी अड्डा बनाने पर विचार किया है।’
क्या कहते हैं एक्सपर्ट? – यह रिपोर्ट चीन की बढ़ती सैन्य महत्वाकांक्षाओं और वैश्विक स्तर पर उसके प्रभाव के विस्तार को दर्शाती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सैन्य अड्डे चीन को अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर नियंत्रण मजबूत करने में मदद कर सकते हैं। चीन और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही मजबूत है, और इस रिपोर्ट से यह सहयोग और गहरा होने की संभावना है।