
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप अंतरिक्ष में पूरी तरह से तैनात हो गया है। इस टेलिस्कोप को फ्रेंच गुएना स्थित कोरोऊ लॉन्च स्टेशन से एरियन-5 ईसीए रॉकेट की मदद से 25 दिसंबर को लॉन्च किया गया था। जेम्स वेब टेलिस्कोप का अंतिम मिरर पैनल शनिवार को पूरी तरह से खुल गया। जिसके बाद अबतक का सबसे शक्तिशाली टेलिस्कोप जल्द ही काम करना भी शुरू कर देगा।
नासा ने बताया- इसके सभी विंग खोले गए : नासा ने ट्वीट कर बताया कि इस टेलिस्कोप के अंतिम विंग को तैनात किया गया है। इंजीनियरों की टीम इस विंग को उसकी सही जगह पर लगाने के लिए कई घंटों तक चलने वाली प्रक्रिया को पूरा करने में जुटी हुई है। चूंकि टेलीस्कोप अपने लॉन्चिंग रॉकेट के अंदर फिट होने के लिए काफी बड़ा था, ऐसे में उसे फोल्ड कर अंतरिक्ष में पहुंचाया गया है।
नासा के सबसे कठिन प्रॉजेक्ट में से एक है यह मिशन : नासा के अनुसार, इस टेलिस्कोप को खोलना एक जटिल और चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है। यह हमारी अबतक की सबसे कठिन प्रॉजेक्ट में से एक है। यह टेलिस्कोप अबतक अंतरिक्ष में नासा की आंख बने रहे हबल का स्थान लेगा। इस टेलिस्कोप को अंतरिक्ष में करीब 15 लाख किमी की ऊंचाई पर स्थापित किया गया है। सौर कचरों और उल्कापिंडों को इस टेलिस्कोप के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है।
तीन एजेंसियों ने मिलकर बनाया टेलिस्कोप : इसे नासा, यूरोपियन स्पेस एजेंसी और कनाडाई स्पेस एजेंसी ने मिलकर बनाया है। नासा के नए टेलिस्कोप में एक गोल्डेन मिरर लगा हुआ है जिसकी चौड़ाई करीब 21.32 फीट है। यह मिरर बेरिलियम से बने 18 षटकोण टुकड़ों को जोड़कर बनाया गया है। हर टुकड़े पर 48.2 ग्राम सोने की परत चढ़ी हुई है जिससे यह एक परावर्तक की तरह काम करता है।
24 अप्रैल को लॉन्च हुआ था टेलिस्कोप : यह टेलिस्कोप पुराने हबल से काफी अलग है। खराबी आने पर हबल के विपरीत धरती से ही इसकी मरम्मत की जा सकेगी। नासा ने शक्तिशाली हबल दूरबीन को 24 अप्रैल, 1990 को जब अंतरिक्ष में लॉन्च किया था, उसके एक दिन बाद इसे अपनी ड्यूटी पर तैनात किया गया था। करीब एक महीने तक वहां रहने के बाद हबल ने पहली बार अपनी आंख 20 मई, 1990 को खोली और अंतरिक्ष से आसमान के एक हिस्से की तस्वीर भेजी थी।
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