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‘UCC के नाम पर हिंदू कानून, मुसलमानों पर लागू नहीं कर सकते’, ओवैसी बोले- इस्लाम में शादी एक कॉन्ट्रैक्ट


सुप्रीम कोर्ट ने हाल में मुस्लिम महिलाओं के हक पर सुनवाई करते हुए कहा कि अब समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का समय आ गया है। सर्वोच्च न्यायालय की इस टिप्पणी पर सियासी घमासान छिड़ गया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, यूनिफॉर्म सिविल कोड के नाम पर हिंदू कानून, मुसलमानों पर लागू नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा, इस्लाम में शादी महज एक कॉन्ट्रैक्ट है, यह जिम्मेदारी नहीं है।
AIMIM ने शुक्रवार को हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी का एक वीडियो पोस्ट किया। जिसमें उन्होंने कहा, आप UCC के नाम पर हिंदू कानून मुसलमानों पर लागू नहीं कर सकते हैं। निकाह हमारे के लिए धार्मिक संस्कार नहीं है, यह धर्म का हिस्सा है। उन्होंने कहा, जेंडर जस्टिस करने वाले जकिया जाफरी से मुलाकात नहीं करते हैं।
इस्लाम में शादी एक कॉन्ट्रैक्ट: ओवैसी – ओवैसी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा, समान नागरिक संहिता की चर्चा एक बार फिर से शुरू हो गई है। UCC की बात करने वालों याद रखो कि इस्लाम में शादी एक कॉन्ट्रैक्ट है। जन्म-जन्म की बात नहीं है। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट है कि हिंदू धर्म में अगर पत्नी ने सास-ससुर की खातिरदारी नहीं की तो यह क्रूरता है, जबकि इस्लाम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। मां-बाप की जिम्मेदारी बेटे की है।
आदिवासियों पर लागू होगा हिंदू मैरिज एक्ट? – AIMIM सांसद ने सवाल उठाया कि क्या हिंदू मैरिज एक्ट आदिवासियों पर लागू होगा? ओवैसी ने कहा, अगर हिंदू धर्म में किसी शख्स को अपनी बीवी को तलाक देना है तो उसे पहले बताना होता है कि क्रूरता हुई। 5-10 साल लगातार मुकदमा चलता है।
ओवैसी ने कहा, भारत के एक राज्य में मुख्यमंत्री हैं, जिनका अपनी पत्नी के साथ 10 सालों से तलाक का मुकदमा चल रहा है। पत्नी तलाक नहीं दे रही है।
ओवैसी ने UCC पर क्या कहा? – AIMIM चीफ ने कहा, आप UCC के तहत हिंदू कानून, मुसलमानों पर लागू नहीं कर सकते हैं। मुझे अपनी धर्म के मुताबिक चलना चाहिए। उन्होंने कहा, जेंडर जस्टिस की बात करने वाले मुसमान महिलाओं को आप पहले शिक्षा दीजिए, नौकरी दीजिए फिर जेंडर समानता पर बात कीजिए।
जफिया जाफरी का नाम लेते हुए ओवैसी ने कहा, जेंडर समानता की बात करने वाले जफिया जाफरी से मुलाकात नहीं करते हैं। उन बच्चों को से मुलाकात नहीं करते जिन्हें दिल्ली में पुलिस ने मार दिया और अब UCC की बात करते हैं, लव जिहाद की बात करते हैं।
बता दें सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का समय आ गया है। अदालत ने 1937 के शरीयत कानून के कुछ प्रावधानों को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
याचिका में शरीयत कानून के कुछ प्रावधानों के बारे में कहा गया है कि वह मुस्लिम महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण है। अदालत ने कहा कि बेहतर होगा कि विधायिका बानी संसद ही इसका फैसला ले क्योंकि राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों के अनुसार, समान नागरिक संहिता लागू करने का अधिकार विधायिका के पास है।