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भारत में बिना लक्षण वाले हर चौथे डायबिटीज मरीज को लिवर फाइब्रोसिस, स्टडी में बड़ा खुलासा


देश में टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में एक नया और गंभीर स्वास्थ्य संकट सामने आया है। एक बड़े देशव्यापी अध्ययन में खुलासा हुआ है कि भारत में हर चौथे डायबिटीज मरीज को लिवर फाइब्रोसिस है जबकि हर 20 में 1 मरीज में सिरोसिस के संकेत पाए गए हैं।
यह अध्ययन सर गंगाराम अस्पताल के प्रोफेसर डॉक्टर आशीष कुमार के नेतृत्व में किया गया और इसे मशहूर लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथ ईस्ट एशिया जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
26% मरीजों में लिवर फाइब्रोसिस की समस्या – जनवरी से जुलाई 2024 के बीच की गई इस मल्टी-सेंटर स्टडी में देशभर के 9202 डायबिटीज मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें लिवर रोग के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे। इसके बावजूद जांच में 26% मरीजों में लिवर फाइब्रोसिस की समस्या देखी गई। 14 फीसदी मरीजों में एडवांस स्टेज का फाइब्रोसिस देखा गया और 5 फीसदी में लिवर सिरोसिस के संकेत पाए गए।
सामान्य वजन वाले 19 फीसदी लोगों में भी फाइब्रोसिस मिला – अध्ययन की एक अहम बात यह रही कि जिन मरीजों में फैटी लिवर नहीं था, उनमें भी 13% को फाइब्रोसिस और 4% को सिरोसिस के संकेत मिले। यानी सिर्फ फैट जमा होना ही लिवर बीमारी का संकेत नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार मोटापा, खराब लिपिड प्रोफाइल, किडनी फंक्शन में कमी और 10 साल से अधिक पुरानी डायबिटीज इस बीमारी के प्रमुख जोखिम कारक हैं। वहीं, सामान्य वजन वाले मरीजों में भी 19% में फाइब्रोसिस पाया गया, जहां उम्र सबसे बड़ा कारण रहा।
डायबिटीज के बाद फाइब्रोसिस सबसे बड़ी समस्या – विशेषज्ञों का कहना है कि लिवर फाइब्रोसिस को अब डायबिटीज की चौथी बड़ी जटिलता के रूप में देखा जाना चाहिए। अध्ययन में यह भी सुझाव दिया गया है कि देश के डायबिटीज प्रोग्राम में लिवर फाइब्रोसिस की नियमित स्क्रीनिंग को शामिल किया जाए, ताकि समय रहते बीमारी की पहचान और इलाज संभव हो सके।