Saturday , March 28 2026 3:02 PM
Home / News / ऑस्ट्रेलिया में मरा मिला 13 फीट लंबा मगरमच्छ, सिर गायब देख हर किसी के उड़े होश, मरने की वजह बनी रहस्य

ऑस्ट्रेलिया में मरा मिला 13 फीट लंबा मगरमच्छ, सिर गायब देख हर किसी के उड़े होश, मरने की वजह बनी रहस्य


ऑस्ट्रेलिया के एक बीच पर बेहद डराने वाला मामला देखने को मिला है। स्थानीय लोग जब बीच पर घूमने निकले तो उन्होंने यहां एक मरा हुआ मगरमच्छ पाया। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात ये रही कि इस मगरमच्छ का सिर कटा हुआ था। पोर्ट डगलस और कुकटाउन के बीच क्वींसलैंड के तट पर हाल ही में इंसानों पर मगमच्छ के हमले देखे गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ स्थानीय लोग मानते हैं कि इन हमलों से नाराज होकर किसी ने इस मगरमच्छ को मार डाला।
क्वींसलैंड पर्यावरण और विज्ञान विभाग (DES) के मुताबिक अभी भी यह साफ नहीं हो सका है कि 13 फुट लंबा (सिर सहित) यह विशाल मगरमच्छ मरा कैसे? सरकारी एजेंसी ने आगे जानकारी दी कि यह शव लगभग सड़ने की कगार पर पहुंच गया था, जिसके कारण कर्मचारी शव का परीक्षण करने में असमर्थ थे। DES ने एक बयान में कहा, ‘मगरमच्छ का शव सड़ने लगा था। इस कारण यह निर्धारित नहीं किया जा सकता कि मानव हस्तक्षेप हुआ है या नहीं। यह भी संभव हो सकता है कि मगरमच्छा का सिर किसी अन्य जानवर ने काटा हो।’
मगरमच्छ के शरीर पर चाकू के निशान – कुछ स्थानीय लोगों का शक है कि एक अन्य मगरमच्छ ने इसे मार डाला और इसका सिर काट दिया। मगरमच्छ फोटोग्राफर और संरक्षणवादी टॉम चाल्मर्स हेस ने कहा कि डीईएस का दावा हास्यास्पद है। मगरमच्छ के शव मिलने की जानकारी होने पर टॉम पहुंचे थे। उन्होंने कहा, ‘मैं तीन घंटे तक मगरमच्छ के शव के पास था। ऐसा कोई निशान नहीं था, जिससे यह पता चले कि एक मगरमच्छ ने इसे मारा है। शरीर पर और गर्दन पर चाकू के बेहद स्पष्ट निशान हैं।’
संरक्षित हैं मगरमच्छ – बिना सिर वाला मगरमच्छ डेंट्री नदी के उत्तर में काऊ बे बीच पर मिला था। क्वींसलैंड के कानून के तहत इस आकार के नर मगरमच्छ को आइकन माना जाता है, जिसका मतलब है कि यह बाकियों की तुलना में ज्यादा संरक्षित है। पशु चिकित्सक के मुताबिक यह 30 से 40 वर्ष का था। ऑस्ट्रेलिया में चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय के शोधकर्ता कैमरून बेकर ने कहा, ‘हम अगर सिर्फ मगरमच्छों की सामाजिक व्यवस्था को समझना शुरू कर रहे हैं। अभी इस बात की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती कि इसका बाकी मगरमच्छों पर क्या असर पड़ेगा।’