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फिलीस्तीन के साथ हो सकती थी शांति कायम… इजरायल के पूर्व पीएम ने बताया कैसे खोया ऐतिहासिक मौका


इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने शनिवार को कहा कि वर्ष 2008 के गाजा संघर्षविराम के बाद इजराइल और फलस्तीन ने शांति प्राप्त करने का एक ऐतिहासिक अवसर खो दिया। ओल्मर्ट ने शांति कायम करने में विफल रहने के लिए हमास के हमलों को कारण बताया। हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वह इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थक नहीं हैं।
ओल्मर्ट ने फर्स्टपोस्ट रक्षा शिखर सम्मेलन में कहा, हमास के घातक और ताबड़तोड़ हमलों के परिणामस्वरूप हमने मौका गंवा दिया। सीमा पर दोनों ओर से किसी प्रकार का टकराव, शत्रुता या हिंसा नहीं थी। उन्होंने कहा कि मुझे 2005 में इजराइली सरकार में उपप्रधानमंत्री बनने का सौभाग्य मिला और हमारी सरकार ने गाजा पूरी तरह से खाली कर दिया। हालांकि वेस्ट बैंक की बात अलग थी लेकिन गाजा में हमने एक सेंटीमीटर जमीन पर भी कब्जा नहीं किया था।
हमारे गाजा छोड़ने के बाद हमले शुरू हुए – उन्होंने कहा, जैसे ही हमने गाजा छोड़ा उसके अगले ही दिन से उन्होंने (हमास) सीमा पार इजराइली क्षेत्रों पर रॉकेट दागने शुरू कर दिए और वे सात अक्टूबर तक भी नहीं रुके जब इजराइल ने आखिरकार बड़े पैमाने पर जवाबी हमला करने का फैसला किया। ओल्मर्ट ने कहा, मुझे लगता है कि 2008 और 2009 की शुरुआत में हमारे और फलस्तीनियों के बीच इस ऐतिहासिक संघर्ष को हल करने का एक सुनहरा अवसर था। और यही वह समय था जब मैंने इजराइल के प्रधानमंत्री के रूप में तथा फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने द्वि-राष्ट्र के समाधान के आधार पर शांति योजना प्रस्तुत की थी।