
ईरान के लिए इजरायल का यह हमला बड़ा झटका है। हमले ने ईरान की एयर डिफेंस पर सवाल खड़े किए हैं। ईरान अपनी न्यूक्लियर फैसिलिटी और सेना के प्रमुख अधिकारियों की रक्षा करने में विफल रहा है
इजरायल की एयरफोर्स ने शुक्रवार सुबह ईरान पर हवाई हमला किया है। इजरायली फौज की ओर से कहा गया है कि उन्होंने ईरानी शहर नातांज में स्थित ईरान के मुख्य परमाणु संवर्धन केंद्र पर हमला किया है। ईरान की सेना के शीर्ष अफसरों को भी इजरायल ने टारगेट किया है। ईरानी सुरक्षा सूत्र ने रॉयटर्स से कहा है कि ईरान ने इजरायली हमले का कड़ा जवाब देगा। अधिकारी ने कहा कि इजरायली हमले का जवाब कठोर और निर्णायक होगा। जवाबी कार्रवाई के लिए फिलहाल उच्च स्तर पर चर्चा हो रही है। ईरान ने पिछले साल इजरायल के हमलों को जवाब दिया था। ऐसे में इस बार उसको भारी नुकसान को देखते हुए ये तय माना जा रहा है कि ईरान की ओर से जवाबी हमला जरूर होगा। एक्सपर्ट अब इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि ईरान कैसे इजरायल को जवाब देगा।
यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली हमलों के बाद ईरान संभावित प्रतिक्रियाओं पर विचार कर रहा है। ईरान को यह तय करना है कि वह कैसे इजरायल को जवाब देगा। ईरान के विकल्पों में छद्म युद्ध (प्रॉक्सी वॉर), मिसाइल और ड्रोन हमले, नौसैनिक गतिविधियां और राजनयिक दबाव शामिल हैं। ईरान ने हमलों से पहले अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दी थी। हालांकि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इजरायली हमलों में शामिल नहीं होने की बात कही है।
ईरान के पास प्रतिक्रिया देने के कई विकल्प हैं। इसमें एक विकल्प उसके प्रॉक्सी गुट हो सकते हैं। ईरान समर्थित कई गठन पश्चिम एशिया के देशों में हैं। इनमें यमन में हूती, लेबनान में हिजबुल्लाह और इराक की मिलिशिया शामिल हैं। ईरान के पास फिलिस्तीन और गाजा में भी गुट रहे हैं। हालांकि गाजा में युद्ध के चलते फिलिस्तीनी समूह कमजोर हो गए हैं। हिजबुल्लाह भी अतीत की तुलना में फिलहाल बहुत कमजोर है।
ईरान के प्रॉक्सी गुट कमजोर होने के बावजूद इजरायल के लिए खतरा बन सकते हैं। इराकी मिलिशिया के पास लंबी दूरी के हमले वाले ड्रोन हैं। उन्होंने पिछले सात वर्षों में ईरान से बैलिस्टिक मिसाइलें हासिल की हैं। इसका मतलब है कि वे इजरायल को निशाना बनाकर हमले कर सकते हैं, जैसा कि उन्होंने पूर्व में किया है। वहीं हूतियों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और ड्रोन हैं। हूतियों ने लगातार इजरायल को तंग किया है। जाहिर है कि ये संगठन इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकते हैं।
ईरान की मिसाइल क्षमता – ईरान की बड़ी ताकत उसकी मिसाइलें हैं। ईरान ने बीते साल इजरायल के खिलाफ हमले में बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल करते हुए अपनी ताकत दिखाई थी। ईरान के पास ऐसी मिसाइले हैं, जो इजरायल तक पहुंच सकती हैं। ईरान ने हालिया वर्षों में जिस तरह से मिसाइल और ड्रोन क्षमता बढ़ाई है, वो इजरायल के लिए सबसे बड़ी चुनौती होंगी। ईरान के इजरायल के खिलाफ हमले में निश्चित रूप से मिसाइल सबसे अहम हथियार हो सकती हैं।
समुद्र में तेहरान की ताकत की बात करें तो ईरान के पास एक पारंपरिक नौसेना के साथ-साथ एक आईआरजीसी नौसेना भी है। ईरान शिपिंग पर हमले करने का विकल्प चुन सकता है। ईरान अपनी नौसेना का उपयोग या तो फारस की खाड़ी या ओमान की खाड़ी में जहाजों पर हमला करने के लिए कर सकता है। वह ड्रोन का उपयोग करके जहाजों पर हमला कर सकता है।
ईरान तीसरे देशों में साजिशों के जरिए भी इजरायल को जवाब देने की कोशिश कर सकता है। ईरान की ओर से दुनिया के कई देशों में इजरायलियों को निशाना बनाया जा सकता है। इसमें तुर्की और ग्रीस के साथ-साथ साइप्रस और दक्षिण अमेरिका, यूरोप और एशिया के देशों में साजिशें शामिल हैं। वह इसके लिए अलग-अलग गुटों का इस्तेमाल सकता है।
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