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जापान सागर से चीन- रूसी फाइटर जेट ने जापानी-दक्षिण कोरियाई जहाजों को भगाया, एशिया में नई तनातनी, पुतिन ने भेजे बॉम्बर्स

जापान ने इस पूरे क्षेत्र में तेजी से अपनी क्षमताएं बढ़ानी शुरू कर दी है। पिछले हफ्ते जापान ने ताइवान से सिर्फ 70 मील दूर स्थित योना‍गुनी द्वीप पर एक नया इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एयर-डिफेंस यूनिट तैनात करने की घोषणा की है। इससे पहले जापान ने इस द्वीप पर एयर-डिफेंस मिसाइल सिस्टम तैनात करने की योजना का खुलासा किया था।
एशिया में नई तनातनी शुरू हो गई है और जापान सागर से चीन और रूसी फाइटर जेट्स ने जापान और दक्षिण कोरियाई फाइटर जेट्स को खदेड़ दिया है। दरअसल, जापान सागर के इंटरनेशनल क्षेत्र में चीन और रूसी फाइटर जेट्स ज्वाइंट अभ्यास कर रहे थे। जिसे देखते हुए जापान और दक्षिण कोरिया ने अपने अपने लड़ाकू विमानों को भेजा था। ये वाकया उस वक्त हुआ है, जब ताइवान को लेकर जापान और चीन के बीच का तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। जापान में हमले की स्थिति में ताइवान का साथ देने की बात कही है।
जापान रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि दो रूसी Tu-95 बेयर टर्बोप्रॉप बॉम्बर जापान सागर से पूर्वी चीन सागर में दक्षिण की ओर उड़ हैं। जापान के पश्चिम और दक्षिण कोरिया के दक्षिण-पूर्व के बीच उड़ान भरने के बाद, वे ओकिनावा जापान के पास दो चीनी H-6 सीरीज के बॉम्बर्स में शामिल हो गए। मंत्रालय के मुताबिक, “इसके बाद उन्होंने शिकोकू के तट से पूर्वी चीन सागर से प्रशांत महासागर तक लंबी दूरी की जॉइंट फ्लाइट की।” जापानी रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि बॉम्बर्स के साथ चार चीनी J-16 फ्लैंकर मल्टीरोल फाइटर डेरिवेटिव्स भी शामिल हुए। बयान में कहा गया है कि “उसके बाद ये बॉम्बर्स ओकिनावा आइलैंड और मियाको आइलैंड के बीच आगे-पीछे उड़े।” बेयर बॉम्बर्स बाद में उसी रास्ते से उत्तर में जापान सागर में वापस उड़ गए, जबकि चीनी जेट चीन की ओर वापस उड़ गए।
चीन और जापान के बीच बढ़ा तनाव – वहीं, दक्षिण कोरिया की सैन्य प्रतिक्रिया भी तेज रही। उसके ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने बताया है कि दो चीनी और सात रूसी सैन्य विमान कोरिया एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (KADIZ) में दाखिल हो गये थे, जिसके बाद दक्षिण कोरिया ने अपने लड़ाकू विमान भेजे। करीब एक घंटे तक ये विमान KADIZ में आते-जाते रहे और फिर बाहर निकल गए। आपको बता दें कि साल 2019 से चीन-रूस इस इलाके में लगभग हर साल एक या दो बार ऐसी संयुक्त उड़ानें संचालित करते रहे हैं, लेकिन बगैर कोई सूचना दिए। जिससे अकसर टकराव की आशंका बन जाती है। नवंबर 2024 में भी दोनों देशों के 11 सैन्य विमानों ने संयुक्त रूप से KADIZ जोन में भेजा था।