
ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी के पूर्व चीफ एलेक्स यंगर ने दावा किया है कि अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध में ईरान को बढ़त हासिल है। MI6 के पूर्व बॉस ने यह आकलन ऐसे समय में पेश किया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान युद्ध को खत्म करने के लिए भीख मांग रहा है। हालांकि, तेहरान ने ट्रंप के दावों का खंडन किया है और कहा है कि वह किसी युद्धविराम समझौते पर बात नहीं कर रहा है।
ईरान के मिलिट्री प्लान की तारीफ – MI6 के पूर्व चीफ ने कहा कि तेहरान ने युद्ध के मैदान में अप्रत्याशित लचीलापन दिखाया है। द इकोनॉमिस्ट से बात करते हुए यंगर ने कहा, मुझे इस निष्कर्ष पर पहुंचने का खेद है, क्योंकि मेरी पीढ़ी के कई MI6 अधिकारियों की तरह हमने भी अपने करियर के अधिकांश समय में IRGC की हिंसा और क्रूरता का सामना किया है।
उन्होंने कहा कि उनका यह आकलन ईरान के लिए किसी प्रेम की वजह से नहीं है। यंगर ने कहा, ‘हमारे बीच कोई प्यार नहीं है और मैंने अली खामेनेई के लिए एक भी आंसू नहीं बहाया।’ ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई 28 फरवरी को युद्ध को शुरुआत में ही इजरायल और अमेरिकी हमले में मारे गए थे।
असलियत यह है कि अमेरिका ने इस काम को कम करके आंका और मुझे लगता है कि करीब दो हफ्ते पहले ही उसने ईरान के हाथों अपनी बढ़त खो दी। एलेक्स यंगर, पूर्व MI6 चीफ
यंगर ने कहा कि जितना किसी ने सोचा होगा, ईरानी शासन उससे कहीं ज्यादा मजबूत साबित हुआ है। पूर्व ब्रिटिश खुफिया चीफ ने कहा कि ईरान ने पिछले जून में ही कुछ अच्छे फैसले लिए थे, जिससे उन्हें इस बेहद जबरदस्त हवाई हमले के सामने ज्यादा मजबूती मिली है।
ईरान का प्रतिरोध कैसे रहा जारी – ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता को अलग-अलग जगहों पर फैला दिया।
सभी सैन्य यूनिट को जवाब देने और हथियारों के इस्तेमाल करने की छूट दे दी।
नेतृत्व खत्म होने के बाद भी ईरान का प्रतिरोध जारी रहा क्योंकि सभी यूनिट स्वतंत्र काम कर रही थीं।
ईरान की युद्ध रणनीति – यंगर ने आगे ईरान की व्यापक रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि वह अपने विरोधियों पर दबाव बढ़ाने के लिए कई मोर्चे को निशाना बना रहा है।
तेहरान ने ‘हॉरिजॉन्टल एस्केलेशन’ का रास्ता अपनाया है। इसका मतलब है कि वे अपनी पहुंच में आने वाले किसी भी लक्ष्य पर रॉकेट दाग रहे हैं।
ईरान का प्लान कर गया काम – यंगर ने कहा कि ईरान की यह रणनीति उन्हें शुरुआत में पागलपन लगी थी, लेकिन यह रणनीति बेहद सफल रही है। असल में यह अमेरिका को भारी कीमत चुकाने पर मजबूर करने का बहुत ही कारगर तरीका साबित हुआ है। ईरान ने ऊर्जा की अहमियत को समझा और होर्मुज स्ट्रेट को खतरे में रखकर युद्ध को वैश्विक कर दिया। होर्मुज स्ट्रेट एक संकरा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर के खुले समुद्र से जोड़ता है। यहां से दुनिया का 20 फीसदी तेल निकलता है। ईरान ने इसे चोक करके दुनिया में ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है, जिससे भारत भी प्रभावित है।
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