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ईरान युद्ध में पाकिस्तान बिचौलिया! पूर्व रॉ चीफ विक्रम सूद बोले- शिया, सुन्नी वाला ऐंगल भी है


पश्चिम एशिया संकट के बीच में पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की जुगाड़ में लगा हुआ है। लेकिन, उसका वर्तमान और अतीत उसका पीछा नहीं छोड़ा रहा। यही वजह है कि पूर्व रॉ चीफ विक्रम सूद ने भी उसके मंसूबों पर संदेह जताया है।
ईरान युद्ध रोकने को लेकर पाकिस्तान का इरादा और उसकी अपनी विश्वसनीयता दोनों संदेह के घेरे में है। न तो इस युद्ध में शामिल पक्ष उसपर यकीन करने को तैयार दिख रहे हैं और न ही उसकी करतूतों से वाकिफ सुरक्षा एक्सपर्ट।
‘पाकिस्तान सिर्फ वेन्यू दे सकता है’ – रॉ के पूर्व प्रमुख विक्रम सूद ने एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच मध्यस्थ बनने के पाकिस्तानी दावों पर कहा, ‘वह सिर्फ वेन्यू दे रहा है। वह बैठक करके इस प्रक्रिया की निगरानी नहीं कर रहा…आप बातचीत के लिए एक तटस्थ जगह तलाशते हैं। वास्तव में वह तटस्थ नहीं है।’
उन्होंने आगे कहा, ‘वह अमेरिका की पॉकेट में है,एक भरोसेमंद व्यक्ति, वे सोचते हैं, ईरानियों के साथ बातचीत में उनकी मदद कौन करेगा….।’
वहां शिया-सुन्नी ऐंगल भी है, अतीत में दिक्कतें भी रही हैं। इसलिए मुझे नहीं लगता है कि पूरा भरोसा है…। विक्रम सूद, रॉ के पूर्व प्रमुख
‘पाकिस्तान जिहादी आतंकवाद फैला रहा है’ – पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों पर इजरायली विदेश मंत्रालय की विशेष दूत फ्लेउर हसन नाहूम ने तो और भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है, क्योंकि उनके अनुसार वह दुनिया भर में ‘जिहादी टेररिज्म’ फैला रहा है।
‘प्रासंगिक बने रहने की कोशिश कर रहा’ – उन्होंने भी एएनआई से कहा है, ‘मुझे लगता है कि वो प्रासंगिक बने रहने की कोशिश कर रहा है। वह खुद ही जिहादी आतंकवाद की वजह से दुनिया के लिए बहुत बड़ी समस्या है। लेकिन, आप जानते हैं, वह कोशिश करेगा, कर सकता है। मुझे नहीं लगता कि उसे बहुत सफलता मिलेगी।’
भारत अपने मित्र इजरायल के बहुत करीबी है। आप जानते हैं कि युद्ध से कुछ दिन पहले ही आपके प्रधानमंत्री यहां थे; और हम समझते हैं कि भारत का सभी के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं; और वह कहीं ज्यादा अच्छा मध्यस्थ बन सकता है, अगर आप मुझसे पाकिस्तान की तुलना में पूछेंगे। फ्लेउर हसन नाहूम, इजरायली विदेश मंत्रालय की विशेष दूत
ईरान ने पहली कोशिश में दिया पाकिस्तान को झटका – वैसे सोमवार को पाकिस्तान की ओर से संभावित बातचीत कराने के ऑफर को ईरान ठुकरा चुका है।
संकेत यही है कि पाकिस्तान का युद्ध रुकवाने में मध्यस्थता की भूमिका निभाने वाला मंसूबा पूरा होने की संभावना नहीं के बराबर है।
ईरान ने ऐसे संभावित प्रस्तावों को अपरिपक्व बताते हुए फिलहाल इससे दूरी बना रखी है।