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बाराटांग | चूना पत्थर की गुफाएं और कीचड़ के ज्वालामुखी


भारत के तीन नए स्थलों बाराटांग, नारकोंडम और बैरन द्वीप तथा छत्तीसगढ़ के सिरपुर को यूनेस्को की अस्थायी विश्व धरोहर सूची में जगह मिली है। इसके साथ भारत के सूचीबद्ध स्थलों की संख्या 81 हो गई है। अंतिम मान्यता के लिए इनके महत्व और संरक्षण से जुड़े दस्तावेज पेश करने होंगे।
भारत की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने की संभावनाओ वाले तीन नए स्थलो को यूनेस्को की अस्थायी सूची मे जगह मिली है। इसके साथ भारत की इस सूची मे शामिल स्थलो की संख्या बढ़कर 81 हो गई है।
1. बाराटांग | चूना पत्थर की गुफाएं और कीचड़ के ज्वालामुखी
कहां: अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
खासियत: यहां चूना पत्थर की कई गुफाएं और सक्रिय कीचड़ के ज्वालामुखी है।
प्राकृतिक महत्व: गुफाओं का दुर्गम इलाका और ऊबड़-खाबड़ जमीन इसे वैज्ञानिक शोध के लिहाज से खास बनाती है।
कैसे बनी चट्टाने: समुद्री जीवों के खोल, मूंगे और उनके अवशेष वर्षों में जमा होकर चूना पत्थर बने।
2. नारकोंडम और बैरन द्वीप | ज्वालामुखियों की अनोखी दुनिया
कहां: अंडमान द्वीपसमूह
खासियत: ये बर्मा-अंडमान-जावा ज्वालामुखीय क्षेत्र की आंतरिक श्रृंखला में चतुर्थ कल्प के ज्वालामुखी हैं।
प्राकृतिक महत्व: अलग-थलग रहने के कारण ये द्वीप ज्वालामुखीय गतिविधियों, और स्थानीय प्रजातियों की स्टडी के लिए महत्वपूर्ण हैं।
3. सिरपुर | इतिहास, धर्म और स्थापत्य का संगम
कहां: महासमुंद जिला, छत्तीसगढ़
खासियत: महानदी के पूर्वी तट पर स्थित यह पुरातात्विक स्थल रायपुर से 78 किलोमीटर दूर है।
ऐतिहासिक महत्व: प्राचीन सिरपुर को शरभपुरीय वंश के शासन में कोसल राज्य की राजधानी के रूप में विकसित किया गया। बाद में पांडुवंशी वंश के दौरान भी इसका विकास हुआ।
अस्थायी सूची में शामिल होने का क्या है मतलब?
यूनेस्को की अस्थायी सूची में जगह मिलने से इन स्थलों के विश्व धरोहर बनने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं, लेकिन यह अंतिम मान्यता नहीं है। भारत को इन स्थलों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व से जुड़े दस्तावेज और संरक्षण योजनाएं पेश करनी होंगी। इसके बाद यूनेस्को की प्रक्रिया के तहत इनके नामों पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।