
प्राचीन काल से ही धातु पहनने की परंपरा चली आ रही है। लोग सोने, चांदी और लोहे की अंगूठी या कड़ा पहनना पसंद करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में हर धातु का संबंध किसी न किसी ग्रह से जुड़ा हुआ है। सोने का संबंध बृहस्पति और लोहे का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है। वहीं, वैदिक ज्योतिष में चांदी का संबंध मुख्य रूप से चंद्रमा और शुक्र से होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चांदी की उत्पत्ति भगवान शिव के नेत्रों से हुई थी इसलिए चांदी को अत्यंत पवित्र और सात्विक धातु माना जाता है।
चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक हैं ऐसे में चांदी पहनने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। चांदी का संबंध शुक ग्रह से भी माना जाता है, जो सुख-समृद्धि और भौतिक सुखों का प्रतीक हैं। ऐसे में चांदी धारण करने से कुंडली में शुक्र की स्थिति मजबूत होती है। हालांकि ज्योतिष में चांदी पहनने के कुछ जरूरी नियम बताए गए हैं। जिनको नजरंदाज करने से चांदी फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकती है।
चांदी पहनने के फायदे – कुंडली देखकर चांदी पहनानी शुभ माना जाता है। चंद्रमा अगर उच्च का नहीं है या राहु और शनि के साथ ग्रसित नहीं हो तभी चांदी पहनना लाभकारी सिद्ध होता है।
चंद्रमा कुंडली में अगर न्यूट्रल हो तो चांदी धारण करना शुभ माना जाता है। चांदी का सही प्रयोग या इस्तेमाल मन मजबूत करता है और दिमाग तेज बनाता है।
जिन लोगों की कुंडली में मंगल भारी हो उनके लिए भी चांदी पहनना फायदेमंद माना जाता है। इससे गुस्सा शांत होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
चांदी धारण करने से पहले कुंडली में चंद्रमा के साथ अन्य ग्रहों की अनुकूल स्थिति भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाती है। चंद्रमा के अलावा दूसरे ग्रहों का भी अच्छा होना जरूरी होता है।
चांदी पहनने के नुकसान – कुंडली में चंद्रमा, राहु या शनि के साथ ग्रसित हो या चंद्रमा ग्रहण योग में हो तो उन लोगों को चांदी नहीं पहननी चाहिए। इससे मानसिक अशांति और वैवाहिक जीवन में परेशानी बढ़ती है।
ज्योतिष, में चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। ऐसे में चंद्रमा अगर कुंडली में उच्च का है तो चांदी पहनने से मन अस्थिर हो सकता है।
चंद्रमा हमारे शरीर के जल तत्व और कफ को नियंत्रित तरता है। चांदी पहनने से चंद्रमा का प्रभाव बढ़ा सकता है, जिससे मानसिक स्थिति पर गहरा असर पड़ता है।
IndianZ Xpress NZ's first and only Hindi news website