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शिया धर्मगुरू के सन्यास की घोषणा से इराक में हिंसक झड़प, अल-सदर के ऐलान से बिगड़ सकते हैं हालात

इराक के एक प्रभावशाली शिया धर्मगुरु मुक्तदा अल-सदर ने सोमवार को राजनीति से हटने की घोषणा की। इसकी प्रतिक्रिया में उनके नाराज सैकड़ों समर्थक सरकारी महल पहुंच गए। इस दौरान अल-सदर और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई जिसमें कम से कम पांच प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। चिकित्सा अधिकारियों ने कहा कि शिया धर्मगुरु की घोषणा के बाद विरोध प्रदर्शनों के दौरान दंगा रोधी पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी में कम से कम 15 प्रदर्शनकारियों घायल हो गए। उन्होंने बताया कि पुलिसकर्मियों ने इस दौरान आंसू गैस के गोले छोड़े जिसमें और 12 से अधिक घायल हो गए।
इराक की सेना ने बढ़ते तनाव को शांत करने और झड़पों की आशंका को दूर करने के उद्देश्य से सोमवार को शहर भर में कर्फ्यू की घोषणा कर दी। एक बयान के अनुसार, सेना ने धर्मगुरु के समर्थकों से भारी सुरक्षा वाले सरकारी क्षेत्र से तुरंत हटने और ‘संघर्ष या इराकी खून बहने से रोकने के लिए’ आत्म-संयम का पालन करने का आह्वान किया। इससे यह आशंका उत्पन्न हो गई कि इराक में हिंसा भड़क सकती है जो पहले से ही राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है।
जैसे ही सदर ने राजनीति छोड़ने का ऐलान किया उनके समर्थक महल में दाखिल हो गए। समर्थकों ने उस रिपब्लिक पैलेस पर कब्‍जा कर लिया जहां पर पीएम का घर और दूसरी सरकारी इमारतें हैं। महल के अंदर रस्सियों से समर्थक दाखिल हुए और उन्‍होंने सीमेंट के बैरियर्स को भी गिरा दिया। इस जगह पर ही इराकी सरकार के कई मुखिया रहते हैं।
शुक्रवार को राजधानी बगदाद में सत्ता केंद्र माने जाने वाले इलाके में शुक्रवार को एक प्रभावशाली मौलवी के आह्वान पर हजारों लोग शक्ति -प्रदर्शन के लिए सामूहिक नमाज में पहुंचे थे। यह कार्यक्रम देश में गहराते राजनीतिक संकट के बीच हुआ। इस संकट के कारण राजधानी में तनाव पैदा हो गया है।अल-सदर ने पूरे इराक से अपने अनुयायियों को बगदाद के ग्रीन जोन में प्रार्थना के लिए जुटने का आह्वान किया था। शहर में यह ग्रीन जोन भारी सुरक्षा वाला इलाका है जहां सरकारी भवन एवं विदेशी दूतावास हैं।
अल-सदर के समर्थक चार सप्ताह से अधिक समय से संसद भवन के बाहर धरने पर बैठे हैं। अल-सदर की घोषणा के तुरंत बाद, उनके सैकड़ों अनुयायी विरोध करने के लिए सरकारी महल पहुंच गए जिसमें कार्यवाहक प्रधानमंत्री मुस्तफा अल-कदीमी का मुख्य कार्यालय है। अल-सदर ने इससे पहले भी परिस्थितियों को देखते हुए राजनीति से संन्यास की घोषणा की है। हालांकि कुछ लोगों ने यह आशंका जतायी है कि इस बार के उनके कदम से देश की स्थिति और बिगड़ सकती है, जो पहले से ही खराब है।
अल-सदर ने अपने बड़े जमीनी आधार का अपने विरोधियों के विरूद्ध दबाव की तरकीब के तौर पर इस्तेमाल किया है। उनकी पार्टी पिछले साल अक्टूबर में संघीय चुनाव में सबसे अधिक सीटें जीतने के बाद भी सरकार नहीं बना पायी थी। पिछले सप्ताह उनके हजारों अनुयायी अल-सद्र के शिया विरोधियों को सरकार गठन से रोकने के प्रयास के तहत संसद में घुस गये थे। मुक्तदा अल सद्र संसद को भंग करने और समय पूर्व चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं ।
अल-सदर की जीत के बाद शुरू हुआ संकट : इराक की सरकार में गतिरोध तब से आया है जब धर्मगुरु मुक्तदा अल-सदर की पार्टी ने अक्टूबर के संसदीय चुनावों में सबसे अधिक सीटें जीती थीं लेकिन वह बहुमत तक नहीं पहुंच पाये थे। उन्होंने आम सहमति वाली सरकार बनाने के लिए ईरान समर्थित शिया प्रतिद्वंद्वियों के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया था। अल-सदर के समर्थक जुलाई में प्रतिद्वंद्वियों को सरकार बनाने से रोकने के लिए संसद में घुस गए और चार सप्ताह से अधिक समय से धरने पर बैठे हैं। उनके गुट ने संसद से इस्तीफा भी दे दिया है।
सन्यास की घोषणा बिगाड़ सकती है हालात : यह पहली बार नहीं है जब अल-सदर ने संन्यास की घोषणा की है। वह इससे पहले भी ऐसी घोषणा कर चुके हैं। कई लोगों ने अल-सदर के इस कदम को वर्तमान गतिरोध के बीच प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ बढ़त हासिल करने का एक और प्रयास करार दिया। हालांकि कुछ ने यह आशंका जतायी है कि इस बार के उनके कदम से देश की स्थिति और बिगड़ सकती है, जो पहले से ही खराब है। सोमवार को सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने रिपब्लिकन पैलेस के बाहर सीमेंट के बैरियर को रस्सियों से नीचे गिराया और महल के फाटकों को तोड़ दिया। उनमें से कई महल के सभागार में पहुंच गए।