
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रो ने ताइवान पर दिए अपने नए बयान का बचाव किया है। पिछले दिनों चीन दौरे के खत्म होने पर मैंक्रो ने एक इंटरव्यू में कहा था कि फ्रांस को अमेरिका और चीन के बीच होने वाले टकराव में फंसने से बचना चाहिए। मैंक्रो के इस बयान को लेकर उनकी काफी आलोचना भी हो रही है। अटलाटिंक के दोनों तरफ मौजूद राजनीतिक विशेषज्ञ और राजनेता उनके बयान की वजह से उन्हें आड़ें हाथों ले रहे हैं। लेकिन मैंक्रो अपनी बात पर कायम हैं और उनका कहना था कि जो कुछ भी उन्होंने कहा है, वह उस पर कायम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का साथी होने का मतलब ‘जागीरदार’ होना नहीं है।
अपने बारे में सोचना बंद नहीं कर सकते – मैंक्रो ने नीदरलैंड्स दौरे पर कहा, ‘सहयोगी देश होने का मतलब जागीरदार होना नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपने बारे में सोचना बंद कर दें।’ मैंक्रो दो दिनों के नीदरलैंड्स दौरे पर रवाना हुए हैं और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अपनी बात दोहराई। मैंक्रो ने यह भी कहा कि ताइवान की यथास्थिति पर फ्रांस के समर्थन में कोई बदलाव नहीं हुआ है। साथ ही उनका देश वन चाइना पॉलिसी का समर्थक है मगर चाहता है कि स्थिति का शांतिपूर्ण निवारण हो। मैंक्रो के इस बयान के बाद पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन पर चीन के साथ साठगांठ करने का आरोप लगाया है। लेकिन मैंक्रो का कहना है कि उन्हें इन टिप्पणियों का जवाब देने की जरूरत नहीं है।
अमेरिका ने नहीं दी कोई तवज्जो – मैंक्रो के बयान पर व्हाइट हाउस की तरफ से भी टिप्पणी आई है। व्हाइट हाउस ने फ्रेंच राष्ट्रपति की तरफ से दिए गए बयान को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है। व्हाइट हाउस का कहना है कि बाइडेन प्रशासन, फ्रांस के साथ शानदार द्विपक्षीय संबंधों में सहज है और इन संबंधों पर उसे भरोसा है। ताइवान के विदेश मंत्रालय ने भी मैंक्रो के बयान पर इसी तरह का रुख अपनाया है। लेकिन साथ ही फ्रांस के राष्ट्रपति की टिप्पणी पर खास ध्यान दिया है।
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