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रूस-चीन के खिलाफ बड़ा कदम उठाएगा अमेरिका, बढ़ा सकता है परमाणु हथियारों का जखीरा, दुनिया के लिए खतरा


अमेरिका अपने परमाणु हथियारों की नीति में बड़ा बदलाव कर सकता है। रूस, चीन और उत्तर कोरिया से लगातार खतरा बढ़ रहा है, जिसे देखते हुए अमेरिका अपने रणनीतिक परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ा सकता है। अमेरिका के एक अधिकारी ने बताया कि रूस और चीन पर दबाव डालने के लिए ऐसा हो सकता है।
रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच पुतिन की तरफ से कई बार परमाणु युद्ध की धमकी दी गई है। इसके बाद अब अमेरिका परमाणु हथियार बढ़ा सकता है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ सहयोगी ने शुक्रवार को कहा कि रूस, चीन और अन्य विरोधियों से बढ़ते खतरों को रोकने के लिए अमेरिका आने वाले वर्षों में और अधिक रणनीतिक परमाणु हथियारों की तैनाती कर सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के शीर्ष हथियार नियंत्रण अधिकारी प्रणय वड्डी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि रूस और चीन पर दबाव डालने के उद्देश्य से एक नीतिगत बदलाव की रूपरेखा तैयार की गई है।
उन्होंने आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन को बताया, ‘प्रतिद्वंद्वी शस्त्रागार में बदलाव के अभाव में हम आने वाले वर्षों में एक ऐसे बिंदु पर पहुंच सकते हैं जहां वर्तमान तैनात संख्या में वृद्धि की आवश्यक्ता होगी। अगर राष्ट्रपति यह निर्णय लेते हैं तो हमें इसे क्रियान्वित करनेके लिए पूरी तरह से तैयार रहना होगा।’ उन्होंने कहा, ‘अगर वह दिन आता है तो इसका परिणाम यह दृढ़ संकल्प होगा कि हमारे विरोधियों को रोकने और अमेरिकी लोगों और हमारे सहयोगियों और साझेदारों की रक्षा के लिए अधिक परमाणु हथियारों की जरूरत है।’
अमेरिका की नीति में बदलाव – अमेरिका वर्तमान में रूस के साथ 2010 की नई START संधि में निर्धारित 1,550 तैनात किए परमाणु हथियारों की सीमा का पालन कर रहा है। लेकिन रूस ने यूक्रेन को अमेरिका के समर्थन के बाद अपनी भागीदारी को निलंबित कर दिया था। इस कदम को अमेरिका ने कानूनी रूप से अमान्य कहा था। वड्डी का बयान अमेरिका की नीति में बड़े बदलाव को दिखाता है। क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने इसी ग्रुप को साल भर पहले कहा था कि चीन और रूस का मुकाबला करने के लिए अमेरिका के रणनीतिक परमाणु हथियारों की तैनाती बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है।
रूस-चीन बढ़ा रहे अपने हथियार – वड्डी ने कहा कि प्रशासन परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए डिजाइन किए गए अंतरराष्ट्रीय हथियार नियंत्रण और नॉन प्रॉलिफरेशन व्यवस्थाओं के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन उन्होंने कहा, ‘रूस, चीन और उत्तर कोरिया सभी अपने परमाणु हथियारों का तेजी से विस्तार कर रहे हैं और उनमें विविधता ला रहे हैं। वह हथियार नियंत्रण में बहुत कम या कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि तीनों देशों के अलावा ईरान एक दूसरे के साथ ऐसे तरीकों से सहयोग और समन्वय कर रहे हैं जो शांति और स्थिरता के विपरीत हैं। यह अमेरिका और उसके सहयोगियों को धमकी देकर क्षेत्र में तनाव बढ़ाते हैं।