
पश्चिम एशिया युद्ध के बीच अब खाड़ी के बाब अल मंदेब स्ट्रेट ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट से अपने जहाजों की सुरक्षित वापसी टेढ़ी खीर तो था ही, अब बाब अल मंदेब को लेकर यमन के हूती विद्रोहियों ने भी धमकी दी है। हूती ईरान का समर्थन करते हैं। पहले भी उन्होंने धमकी दी थी कि वह ‘एक लीटर भी तेल’ नहीं ले जाने देंगे। हाल ही में इजरायल पर मिसाइल हमले करके हूतियों ने पश्चिम एशिया युद्ध में पहली बार एंट्री की है। ऐसे में अगर होर्मुज के मौजूदा संकट के बाद बाब अल मंदेब भी बाधित हुआ तो इसका भारत समेत पूरी दुनिया के तेल समेत हर तरह के कारोबार पर असर पड़ सकता है। पूरी बात समझते हैं।
बाब अल मंदेब बन सकता है आंसुओं का द्वार – बाब अल मंदेब को अरबी में आंसुओं का द्वार कहा जाता है। अरब कहानियों में इसे उस खतरे के रूप में देखा जाता है, जिसमें नौवहन के दौरान खतरों का सामना करना पड़ता है। इसे यह भी कहा जाता है कि एक भूंकप ने अरब प्रायद्वीप को हॉर्न ऑफ अफ्रीका से अलग कर दिया था।
भारत के लिए बाब अल मंदेब बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत का करीब 95 फीसदी कारोबार समुद्री रूटों से ही होता है। होर्मुज स्ट्रेट से भारत जहां खाड़ी के देशों से तेल और गैस मंगाता है, वहीं, बाब अल मंदेब रूट से भारत के बाकी कारोबार होते हैं।
बाब अल मंदेब कहां है और यह क्यों मायने रखता है – मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बाब अल मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। यह हॉर्न ऑफ अफ्रीका के जिबूती और यमन के बीच है। यह लाल सागर के लिए एंट्री गेट है, जहां से सीधे स्वेज नहर पहुंचा जा सकता है।
बाब अल मंदेब 100 किलोमीटर लंबा और 29 किलोमीटर चौड़ा है। यहां से जहाज नियंत्रित रूप में हमलों से बचते हुए गुजरते हैं।
करीब 10-12 फीसदी वैश्चिक समुद्री व्यापार और 9 फीसदी कच्चा तेल हर दिन यहां से गुजरता है। यह दक्षिणी स्वेज नहर का गेट भी है।
भारत के लिए इसलिए अहम है बाब अल मंदेब – लाल सागर रूट भारत के यूरोप और उत्तरी अफ्रीका से कारोबार के लिए बेहद अहम रहा है। क्रिसिल रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, 2022-23 के दौरान बाब अल मंदेब से भारत का करीब 50 फीसदी निर्यात होता है और 30 फीसदी आयात होता है।
भारत का यूरोप से करीब 80 फीसदी कारोबार बाब अल मंदेब से होकर गुजरता है। भारत का कुल वस्तु निर्यात का 15 फीसदी से ज्यादा यूरोपीय यूनियन को इसी रास्ते से किया जाता है। यह सालाना करीब 450 बिलियन डॉलर है।
यमन के विद्रोहियों से क्या खतरा है – हूती विद्रोहियों ने यमन के लाल सागर के तटों पर कब्जा किया हुआ है। 2023 से अब तक इन विद्रोहियों ने ड्रोन और मिसाइलों की मदद से 100 से ज्यादा वाणिज्यिक पोतों को नुकसान पहुंचाया है।
रायटर्स की रिपोर्ट में ईरानी मीडिया से मिले संकेतों के अनुसार, अगर अमेरिकी हमला हुआ तो हूती विद्रोही लाल सागर पर हमले करना शुरू कर देंगे।
हूती विद्रोहियों ने बीते शनिवार को इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए हैं। 28 फरवरी से अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद से पहली बार हूती विद्रोहियों ने ये हमले किए हैं।
हूतियों ने कहा है कि उसके निशाने पर इजरायल के संवेदनशील मिलिट्री ठिकाने हैं। वहीं, इजरायल ने कहा है कि उसने यमन से लॉन्च होने वाली मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया है।
दुनिया के 30 फीसदी तेल सप्लाई पर ग्रहण – होर्मुज तो पहले ही बंद है। सूत्रों के अनुसार, हमले तेज होने की स्थिति में ईरान बाब अल मंदेब भी बंद करवा सकता है। ऐसे में दोनों स्ट्रेट के बंद होने से दुनिया के करीब 30 फीसदी तेल की आपूर्ति के ठप होने का खतरा बढ़ सकता है।
EIA के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के मध्य में बाब अल मंदेब से 42 लाख बैरल प्रति दिन कच्चा तेल और पेट्रोलियम प्रोडॅक्ट्स गुजरा था। यह पूरी दुनिया का करीब 5.3 फीसदी समुद्री तेल कारोबार है। यह दुनिया के करीब 5 फीसदी तेल खपत का हिस्सा है।
केप ऑफ गुड होप घाटे का सौदा – अगर, होर्मुज या बाब अल मंदेब के बजाय दक्षिण अफ्रीका के केप प्रायद्वीप के दक्षिणी छोर पर स्थित केप ऑफ गुड होप से होकर अगर जहाज आते हैं तो उन्हें सफर पूरा करने में अतिरिक्त 12-15 दिन और लग सकता है।
इससे ईंधन की लागत 40 फीसदी तक बढ़ सकती है। फल-सब्जियों के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा रहती हैं तो इससे देश में महंगाई बढ़ सकती है।
पहले भी बाब अल मंदेब बाधित हो चुका है – मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बाब अल मंदेब पहले भी बाधित हो चुका है। 1973 में अरब-इजराययल युद्ध, 2000 के दशक में सोमालियाई समुद्री डकैतों की धमकी की वजह से, 2015 से यमन युद्ध के चलते, 2023 में इजरायल के गाजा पर किए गए हमलों के चलते हूतियों ने बाब अल मंदेब से कोई भी जहाज गुजरने पर हमले करने शुरू कर दिए। इसके बाद से बाब अल मंदेब कई बार प्रभावित रहा है।
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