
अफ्रीका, दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा आबादी वाला हिस्सा और जहां पर खनिज तत्वों की भरमार है। इस हिस्से पर चीन ने पिछले कई वर्षों से अपनी लालची नजरें जमाई हुई हैं। मगर अब अफ्रीका ने भी चीन के खिलाफ एक्शन लेना शुरू कर दिया है। अफ्रीका के कई देश चीन के खिलाफ सामने आ रहे हैं और उसके खिलाफ कई तरह के एक्शन ले रहे हैं। कुछ दिनों पहले नाइजीरिया ने ऐसा ही एक उदाहरण पेश किया है। नाइजीरिया ने 28 अगस्त को देश में कुछ अवैध चीनी खनन कार्यों को निलंबित कर दिया। इसके अलावा नाइजीरिया की तरफ से टाइटेनियम अयस्क के अवैध खनन में शामिल होने के लिए एक चीनी खनन कंपनी रुइताई माइनिंग कंपनी के ऑपरेशन को भी खत्म कर दिया गया है।
कांगो में होते हमले- इससे पहले मई में भी नामीबिया ने चीनी खनन कंपनी शिनफेंग इन्वेस्टमेंट्स का लाइसेंस रद्द कर दिया था। नामीबिया ने यह कदम इसलिए उठाया था क्योंकि इसने गलत तरीकों से लिथियम की खोज के लिए लाइसेंस हासिल किया था। वहीं, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) ने सोने और अन्य खनिजों के अवैध खनन में शामिल पाए जाने के बाद दक्षिण किवु में छह चीनी कंपनियों के संचालन को निलंबित कर दिया है।
डीआरसी में दो सितंबर को ही एक हमला हुआ था जिसमें दो चीनी नागरिकों की मौत हो गई थी। यह हमला उस समय हुआ था जब देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में हथियारबंद लुटेरों ने सोना ले जा रहे एक खनन काफिले को निशाना बनाया। हाल के कुछ महीनों में अफ्रीका में चीनी नागरिकों पर हमले आम हो गए हैं। मार्च 2023 में मध्य अफ्रीकी गणराज्य में सोने की एक खनन कंपनी में काम करने वाले नौ चीनी नागरिकों की हथियारबंद लोगों ने हत्या कर दी थी।
अफ्रीका और चीन का लालच – अफ्रीका ऐसे दुर्लभ खनिज तत्वों का क्षेत्र है जिनकी वजह से चीन की इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल इंडस्ट्री को काफी फायदा मिल रहा है। अमेरिका के थिंक टैंक विल्सन सेंटर की मानें तो अफ्रीका में खनन कर निकाले गए खनिजों के लिए चीन टॉप पर है। साल 2019 में ही उप सहारा अफ्रीका से चीन को खनिज निर्यात 10 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। यूके के एनजीओ राइट्स एंड एकाउंटेबिलिटी इन डेवलपमेंट (RAID) के अनुसार, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) जैसे देशों में, 40,000 से अधिक बच्चे चीनी खनिकों द्वारा संचालित कोबाल्ट, लिथियम और दुर्लभ पृथ्वी खनिज तत्व खदानों में काम करते हैं।
अफ्रीका में चीनी खनिक – साल 2016 में अपनी रिपोर्ट में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने डीआरसी के कोबाल्ट खनन में चीनी कंपनियों द्वारा बच्चों के इस्तेमाल पर चिंता जताई थी। डीआरसी, भूमि क्षेत्रफल के हिसाब से अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा देश है। यहां पर काफी तादाद में चीनी खनिक शामिल हैं। डीआरसी में कुल 19 कोबाल्ट ऑपरेशंस में से 15 पर या तो चीन का मालिकाना हक है या फिर वह इसे साथ में मिलकर ऑपरेट कर रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक डीआरसी की कोबाल्ट और तांबे की खदानों में चीन के पांच सबसे बड़े चीनी खनन निगमों की हिस्सेदारी है। इन सभी को चीन की मदद वाले बैंकों से करीब 124 बिलियन डॉलर की मदद मिली हुई है। जुलाई 2023 में, डीआरसी में बाल श्रम और अन्य अपमानजनक स्थितियों के माध्यम से खनन किए गए खनिजों के आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिए अमेरिकी सदन में एक उपाय पेश किया गया था।
घाना में भी एक्शन – चीनी कंपनी जियांग जियांग पर साल 2021 में खनन नियमों का पालन नहीं करने के लिए डीआरसी सरकार ने 90,000 डॉलर तक का जुर्माना लगाया गया था। जियांग जियांग को साल 2019 में सोने, हीरे और अन्य खनिजों का पता लगाने के लिए डीआरसी के खनन मंत्रालय से परमिट मिला था। साल 2019 में ही घाना में 33 चीनी नागरिकों को अवैध सोने के खनन कार्यों में शामिल पाए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था। घाना, अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा सोना उत्पादक, व्यापार, खनन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल लगभग 30,000 चीनी नागरिकों का घर है।
Home / News / अफ्रीका को ‘लूट’ रही थीं चीन की कंपनियां, नाइजीरिया से लेकर कांगो तक आगबबूला, ड्रैगन को घेरा!
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