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ताइवान पर हमें मजबूर न करें नहीं तो होगा चीन अमेरिका के बीच युद्ध…शी जिनपिंग ने बाइडेन को दी धमकी!


चीन और ताइवान के बीच सबकुछ ठीक नहीं है, यह बात तो दुनिया जानती है। लेकिन इस मसले पर अमेरिका के साथ टकराव भी बढ़ता जा रहा है। चीन, जो ताइवान पर अपना अधिकार जताता है, उसके राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग अक्‍सर ही यह कहते हैं कि चीनी मिलिट्री ताकत के दम पर ताइवान को अपनी सीमा में मिलाकर रहेगी। ताइवान चीन के इस दावे को मानने से इनकार कर देता है। अब अगर ए‍क रिपोर्ट की मानें तो जिनपिंग इस मामले पर अपने अमेरिकी समकक्ष जो बाइडेन को धमकी तक दे चुके हैं।
जी.20 में मिली धमकी – न्‍यूयॉ‍र्क टाइम्‍स में छपे एक ओपिनियन में दावा किया गया है कि इंडोनेशिया के बाली में नवंबर 2022 में जी-20 सम्‍मेलन के दौरान जिनपिंग ने बाइडेन को स्‍पष्‍ट तौर पर चेतावनी दी थी कि वह ताइवान के मसले में हस्‍तक्षेप न करें। इस आर्टिकल में बाइडेन प्रशासन के एक सीनियर एडमिनिस्‍ट्रेशन अधिकारी के हवाले से यह बात लिखी गई है। इसमें लिखा है कि जिनपिंग ने बाइडेन को साफ-साफ कह दिया था कि वह चीन के ऐसे राष्‍ट्रपति नहीं होंगे जो ताइवान को अपने हाथ से जाने देंगे। अगर बाइडेन ने उन्‍हें मजबूर किया तो फिर अमेरिका और चीन के बीच युद्ध होगा। जिनपिंग ने बाइडेन से कहा था कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति को इस बात का जरा भी इल्‍म नहीं है कि ताइवान का मसला चीन के लोगों के लिए क्‍या है और वह आग से खेल रहे हैं।
धूल में मिल जाएगा ताइवान – ताइवान की राष्‍ट्रपति साई इंग-वेन हाल ही में अमेरिका की यात्रा से लौटी हैं। इस यात्र के बाद भी भड़के चीन ने ताइवान के तट पर एक लाइव-फायर ड्रिल आयोजित की थी। इस ड्रिल के जरिए ताइवान को नए सिरे से चेतावनी दी गई थी कि ताइवान के साथ शांति और स्थिरता फिलहाल संभव नहीं है। विशेषज्ञों की मानें तो किसी भी पक्ष की छोटी सी चूक अमेरिका-चीन युद्ध भड़का सकती है। यह युद्ध बिल्‍कुल वैसा ही होगा जो यूक्रेन की ही तरह ताइवान को धूल में मिला देगा। उनकी मानें तो चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ने इस समय देश की जनता पर मजबूत पकड़ बना ली है। पार्टी अपने शासन या जिनपिंग को चुनौती देने वाले किसी भी शख्‍स या मसले को कुचल सकती है।
जर्मनी ने भी किया आगाह – चीनी विदेश मंत्रालय की तरफ से भी यह कहा जा चुका है कि द्वीप पर ‘ताइवान की आजादी के लिए सेना का प्रयोग या फिर ताइवान स्ट्रेट की यथास्थिति को कमजोर करने और शांति को खतरे में डालने की साजिश रची जा रही है। ऐसे में स्थिरता बनाए रखने के लिए अलगाववादी गतिविधियों का दृढ़ता से विरोध करना चाहिए। चीन को इस मसले पर फ्रांस और जर्मनी का समर्थन मिल चुका है। जर्मनी की विदेश मंत्री अन्नालेना बेयरबॉकने शुक्रवार को अपने चीनी समकक्ष किन गैंग के साथ एक मीटिंग के बाद चेतावनी दी है। उन्‍होंने कहा था कि ताइवान के रास्‍ते हर दिन दुनिया का 50 फीसदी ट्रेड होता है। ऐसे में यहां पर कोई भी सैन्य तनाव पूरी दुनिया के लिए एक डरावनी स्थिति होगी।