
राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहे बुल्गारिया में बीते दो साल में पांचवीं बार रविवार को आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। उम्मीद है कि इससे यहां की राजनीतिक अस्थिरता खत्म होगी और यूक्रेन में जंग की वजह से आई आर्थिक परेशानियों से पार पाने में मदद मिलेगी। मतदान सुबह शुरू हुआ और शाम तक चलेगा तथा शुरुआती परिणाम सोमवार तक आने की उम्मीद है। हालांकि लोगों की उदासीनता की वजह से मतदान प्रतिशत कम रहने का अंदेशा है, क्योंकि लोगों का राजनीतिज्ञों से मोहभंग हो गया है, जो गठबंधन सरकार चला पाने में बार-बार नाकाम रहे हैं।
सबसे खराब रेटिंग वाला देश – वहीं रविवार को मतदान केंद्र के रूप में इस्तेमाल किये जा रहे स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकियां दी गई थी। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, संभवत: रूस से जुड़े हैकर समूहों ने ये धमकियां दी हैं तथा उनका मकसद दहशत फैलाना है, ताकि कम से कम संख्या में लोग मतदान के लिए घरों से निकलें। नये सर्वेक्षण बताते हैं कि राजनीतिक गतिरोध के तत्काल खत्म होने की संभावना नहीं है। बुल्गारिया दुनिया का वह देश है जहां पर आबादी तेजी से कम हो रही है। साथ ही यह यूरोपियन यूनियन (EU) का सबसे खराब रेटिंग वाला देश भी माना जाता है।
क्या है तुर्की की अहमियत – चुनाव में मुकाबला तीन बार के प्रधानमंत्री बोयको बोरिसोव की जीईआरबी और किरिल पेटकोव की ‘वी कंटिन्यू द चेंज पार्टी’ के बीच है, जिसने हाल में दक्षिणपंथी डेमोक्रेटिक बुल्गारिया के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाई थी। बुल्गारिया में 6.3 मिलियन रजिस्टर्ड वोटर्स हैं। दो अप्रैल को होने वाले चुनावों में मतदान लगभग 30 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। तुर्की वह देश है जहां पर सबसे ज्यादा 162 मतपेटियां लगाई जा रही हैं। तुर्की में रहने वाले बल्गेरियाई नागरिकों के पास बुल्गारिया के चुनाव में लगभग 400,000 के संभावित वोट हैं। इसलिए, बुल्गारिया के बाहर और विशेष रूप से तुर्की में वोटों का महत्व और भी बढ़ रहा है।
जीतने के लिए 121 सांसद – चुनाव सर्वेक्षणों के अनुसार, GERB पार्टी और कंटीन्यू टू चेंज पार्टी (PP) को संसद में सत्तारूढ़ और मुख्य विपक्षी दलों के रूप में रखा जा सकता है। मूवमेंट फॉर राइट्स एंड फ्रीडम पार्टी, जिसमें ज्यादातर तुर्क शामिल हैं, तीसरी पार्टी है। सरकार बनाने के लिए उसे कम से कम 121 सांसद चाहिए।
Home / News / दो साल में यूरोप के ‘सबसे खराब’ देश बुल्गारिया में पांचवी बार चुनाव, क्यों तुर्की पर टिकीं नजरें
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