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McMahon Line नाम कैसे पड़ा, क्या ब्रिटिश राज से जुड़ा है इतिहास, अब चीन करता रहता है बवाल


मैकमोहन रेखा भारत और चीन के बीच की सीमा रेखा है। यह पूर्वी हिमालय क्षेत्र में चीन के कब्जे वाले इलाके और भारत के इलाकों के बीच की सीमा तय करती है। भारतीय साम्राज्य में तत्कालीन विदेश सचिव सर हेनरी मैकमोहन ने ब्रिटिश इंडिया और तिब्बत के बीच 890 किलोमीटर लंबी सीमा खींची। इसलिए McMahon Line का नाम सर हेनरी मैकमोहन के नाम पर रखा गया था।
मैकमोहन रेखा भारत और चीन के बीच की सीमा रेखा है। यह पूर्वी हिमालय क्षेत्र में चीन के कब्जे वाले इलाके और भारत के इलाकों के बीच की सीमा तय करती है। इस रेखा को साल 1914 में शिमला समझौते के तहत तय किया गया था। इस रेखा का नाम ब्रिटिश सरकार के विदेश सचिव सर हेनरी मैकमोहन के नाम पर रखा गया था। यह रेखा भारत और तिब्बत के बीच बातचीत का नतीजा था। यह रेखा 1962 के भारत-चीन युद्ध का कारण बनी थी। तिब्बत को अपना हिस्सा मानने की वजह से चीन इस रेखा को नहीं मानता। अमेरिका ने मैकमोहन रेखा को भारत और चीन के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता दी है।
सर हेनरी मैकमोहन के नाम पर पड़ा McMahon Line – भारतीय साम्राज्य में तत्कालीन विदेश सचिव सर हेनरी मैकमोहन ने ब्रिटिश इंडिया और तिब्बत के बीच 890 किलोमीटर लंबी सीमा खींची। इसमें तवांग (अरुणाचल प्रदेश) को ब्रिटिश भारत का हिस्सा माना गया। मैकमोहन लाइन के पश्चिम में भूटान और पूरब में ब्रह्मपुत्र नदी का ‘ग्रेट बेंड’ है। यारलुंग जांगबो के चीन से बहकर अरुणाचल में घुसने और ब्रह्मपुत्र बनने से पहले नदी दक्षिण की तरफ बहुत घुमावदार तरीके से बेंड होती है। इसी को ग्रेट बेंड कहते हैं।