
अमेरिका ने पाकिस्तान को AMRAAM मिसाइल का एडवांस वर्जन AIM-120D बेचने का सौदा किया है। लेकिन, अगर इस डील के पीछे की मजबूरियों को समझा जाए तो ऑपरेशन सिंदूर में अमेरिका की साख को लगा बट्टा है। अमेरिका इसकी बदौलत अपने F-16 विमानों को नई ताकत देना चाहता है।
अमेरिका ने इस बात की पुष्टि की है कि वह अपना एडवांस्ड मीडियम रेंज एयर टू एयर मिसाइल (AMRAAM) AIM-120 पाकिस्तान को बेचने जा रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर से व्हाइट हाउस में मुलाकात के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से इस डील का रास्ता साफ किया गया है। इसके साथ ही पाकिस्तान और अमेरिका नए तरह के रक्षा सहयोग की ओर बढ़ चले हैं। अमेरिका-पाकिस्तान में हुई इस डील को ऑपरेशन सिंदूर के बैकग्राउंड में भी देखा जा सकता है, जिसमें भारत ने कई अमेरिकी F-16 मार गिराए और उसमें लगी इसी मिसाइल की पुरानी वर्जन शायद फुस्स होकर रह गई।
AMRAAM का कैसे होता है इस्तेमाल? – अमेरिका के एरिजोना में टक्सन स्थित हथियार बनाने वाली कंपनी रेथियॉन के अनुसार AMRAAM या एडवांस्ड मीडियम रेंज एयर टू एयर मिसाइल के वेरिएंट AIM-120C-8 और AIM-120D-3 दोनों को ही अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ताओं के लिए बनाया गया है। इनका इस्तेमाल हवा से हवा में और सतह से हवा में हमले के लिए किया जाता है। रेथियॉन की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ये मिसाइल कई तरह के फाइटर जेट से दागी जाने में सक्षम हैं। इनमें F-15 ईगल, F-16 फाइटिंग फाल्कन, F/A-18 सुपर हॉर्नेट, F-22 रैप्टर, यूरोफाइटर टायफून, JAS-39 ग्रिपेन और हैरियर शामिल हैं। इसके अलावे इनका इस्तेमाल F-35 ज्वाइंट स्ट्राइक फाइटर के जरिए भी किया जा सकता है। पाकिस्तान के पास पहले से ही अमेरिकी F-16 हैं और उसे अब इन मिसाइलों का अपग्रेडेड वर्जन मिलने जा रहा है।
AMRAAM मिसाइल कितनी शक्तिशाली? – कंपनी का कहना है कि AMRAAM मिसाइलों की डिजाइन विपरीत परिस्थितियों में भी बिजली की गति से लक्ष्य का पता लगाकर उसपर निशाना साधने के लिए तैयार की गई है। जब इसका इस्तेमाल सतह से हवा में होता है तो यह शॉर्ट से मीडियम रेंज में जमीनी एयर डिफेंस सिस्टम के रूप में काम करता है, जिसे रेथियॉन ने पहले NASAMS का नाम दिया था और अब RTX के नाम से जाना जाता है। अभी अमेरिका, पाकिस्तान और नाटो समेत अपने अन्य सहयोगियों को AMRAAM का जो वर्जन बेच रहा है, उसमें कुल 15 अपग्रेडेड सर्किट कार्ड लगे हुए हैं, जो इस मिसाइल की गाइडेंस सिस्टम को बहुत ही अत्याधुनिक बना चुका है। यही नहीं, अगर भविष्य में भी कोई सॉफ्टवेयर अपग्रेड होता है, तो AMRAAM की नई खेप उसमें भी पूरी तरह से ढलने के हिसाब से तैयार की गई हैं।
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