
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब खेती पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। देश में यूरिया की संभावित कमी को लेकर बाजार में चर्चाएं तेज हैं, हालांकि सरकार का दावा है कि फिलहाल पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है और कारखानों में इसका उत्पादन भी लगातार जारी है।
इस मुद्दे पर दिल्ली के विभिन्न इलाकों में यूरिया डिस्ट्रीब्यूटर्स और डीलरों से बातचीत करने पर सामने आया कि अभी राजधानी में किसी तरह की पैनिक की स्थिति नहीं है। उनका कहना है कि दिल्ली में यूरिया की खपत अन्य राज्यों के मुकाबले बहुत कम होती है और इसकी असली डिमांड जून-जुलाई के बाद देखने को मिलती है, जब धान की फसल लगती है।
अगले 1-2 महीने में बढ़ेगी डिमांड – दिल्ली और हरियाणा में यूरिया सप्लाई करने वाले डिस्ट्रीब्यूटर सुनील खत्री के मुताबिक, फिलहाल यूरिया की कोई कमी नहीं है और डिमांड भी कम है। किसान अभी धान की बुआई की तैयारी में हैं, ऐसे में अगले 1-2 महीने बाद ही इसकी जरूरत बढ़ेगी।
वहीं, बवाना इलाके के एक डीलर राकेश का कहना है कि यूरिया की स्थिति सामान्य है, लेकिन DAP फर्टिलाइजर को लेकर चिंता बनी हुई है। उन्होंने बताया कि दिल्ली देहात में हरी सब्जियां और चारा उगाने वाले किसान DAP का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसकी सप्लाई लंबे समय से सीमित मात्रा में ही मिल रही है।
अंतरराष्ट्रीय हालात DAP पर डाल सकते हैं असर – विशेषज्ञों का मानना है कि जहां यूरिया का उत्पादन देश में ही होता है, वहीं DAP अक्सर आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय हालात इसकी सप्लाई पर असर डाल सकते हैं। फिलहाल सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अप्रैल में अगले साल की खपत का आकलन तैयार किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय होगी।
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