
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि उपमहाद्वीप में किसी भी संकट के लिए भारत को भरोसेमंद विकल्प बनना होगा। उन्होंने कहा कि भारत को सहयोग के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण करना होगा। विश्व में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और भारत को अस्थिरता के बीच रणनीति बनानी होगी।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि उपमहाद्वीप में किसी भी संकट के लिए भारत को ही भरोसेमंद विकल्प होना चाहिए। सोमवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में ‘भारत और विश्व व्यवस्था: 2047 की तैयारी’ विषय पर अरावली शिखर सम्मेलन में विदेश मंत्री ने कहा कि राजनीतिक अस्थिरता के परिदृश्य में भारत को स्वयं ‘‘सहयोग के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण करना होगा।’’
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, ‘यह पड़ोस पहले नीति का सार है। इस उपमहाद्वीप में किसी भी संकट के समय भारत को ही भरोसेमंद विकल्प होना चाहिए।’ जयशंकर ने कहा, ‘विभाजन के परिणामस्वरूप भारत की रणनीतिक गिरावट को दूर करना होगा।’ विदेश मंत्री ने कहा कि विश्व में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और सहयोग के वादे से ध्यान हट रहा है।
Home / Uncategorized / भारत को स्वयं के लिए करना होगा बुनियादी ढांचे का निर्माण… वैश्विक राजनीति में उथल-पुथल के बीच क्या बोले जयशंकर?
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