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चीन-पाकिस्तान की ओर मोड़ा इजरायली हथियारों का मुंह…भारत का तेजस MK1A, राफेल, S-400 और सुदर्शन चक्र बनेगा काल


रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान कई यूरोपीय देशों ने इजरायल से मुंह फेरते हुए उससे रक्षा समझौते रद्द कर दिए हैं। इस बीच, भारत अपने मजबूत दोस्त इजरायल से चुपचाप रक्षा साझेदारी को बढ़ावा दे रहा है। दोनों ऐसी हथियार प्रणाली विकसित कर रहे हैं, जो चीन और पाकिस्तान को टेंशन में डाल दिया है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के अनुसार, इजरायल 2020-2024 के दौरान दुनिया का आठवां सबसे बड़ा हथियार निर्यातक था, जिसकी वैश्विक प्रमुख हथियार निर्यात में 3.1% हिस्सेदारी थी। वेडनेसडे बिग टिकट में पूरी कहानी समझते हैं।
भारत ने खोले इजरायल के लिए दरवाजे – यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में, इज़राइल का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 14.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसने 2023 के 13 बिलियन अमेरिकी डॉलर के पिछले उच्च स्तर को तोड़ दिया। 2024 में यूरोप इजरायली हथियारों का सबसे बड़ा भौगोलिक बाजार था, जिसकी इजरायल के रक्षा निर्यात में 54% हिस्सेदारी थी। अब गाजा में इजरायली युद्ध की बढ़ती आलोचना के कारण इजरायली हथियारों का यूरोपीय बाजार लगातार कमजोर होता जा रहा है। स्पेन और स्लोवेनिया जैसे देशों ने इजरायल के साथ रक्षा कारोबार पर पाबंदी लगा दी। यही काम जर्मनी ने भी आंशिक स्तर पर किया। इजरायली रक्षा कंपनियों को पेरिस एयर शो और यूरोप में NEDS (नीदरलैंड रक्षा प्रदर्शनी और संगोष्ठी) में हिस्सा लेने पर रोक लगा दी गई थी।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-इजरायल रक्षा संबंध बढ़ा – एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ऑपरेशन सिंदूर में उनके सफल इस्तेमाल के बाद और इजरायली हेरॉन ड्रोन खरीदेगा और उन्हें हवा से दागी जाने वाली स्पाइक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों से लैस करेगा। भारतीय सशस्त्र बल पहले से ही तीनों सेनाओं में हेरॉन ड्रोन का एक बड़ा बेड़ा संचालित करते हैं। भारत और इजरायल के बीच पहले से ही मजबूत रक्षा संबंध हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से इस रिश्ते में और इजाफा हुआ है।
इजरायली हथियारों का निर्यात भारत की ओर बढ़ गया – SIPRI के अनुसार, 2020 और 2024 के बीच भारत इजरायली हथियारों का सबसे बड़ा गंतव्य था, जिसका कुल इजरायली हथियार निर्यात में 34% या लगभग एक-तिहाई हिस्सा था। अमेरिका दूसरे स्थान पर था, जिसे इजरायली हथियारों के निर्यात का 13% हिस्सा गया। इसी दौरान, रूस, फ्रांस और अमेरिका के बाद, इजरायल भारत का चौथा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक था। भारत के हथियार आयात में इजरायल का योगदान 9.6% था।
भारत के हथियार भंडार की चाबी है इजरायल – तेजस से सुदर्शन चक्र, ड्रोन से मिसाइल तक इजरायल भारत के सैन्य शस्त्रागार की कुंजी है। इजरायल भारत के स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित लड़ाकू विमान, तेजस एलसीए के लिए कई महत्वपूर्ण पुर्जों की आपूर्ति कर रहा है। तेजस MK-1A वर्जन के लिए इजरायली कंपनियों ने आपूर्ति की है। EL/M-2032 मल्टी-मोड रडार (एल्टा सिस्टम्स), हाई-रिजॉल्यूशन इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इमेजरी और सटीक निशाना लगाने के लिए लाइटनिंग टार्गेटिंग पॉड (राफेल), डर्बी बीवीआर मिसाइल और पाइथन-5 एएएम (राफेल) में इजरायल तकनीक लगी है।
तेजस लड़ाकू विमानों में इजरायली हेलमेट – भारतीय वायु सेना (IAF) का तेजस लड़ाकू विमान इजरायली एल्बिट सिस्टम्स के DASH-IV हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले सिस्टम (HMDS) से भी लैस है। ये इजरायली सिस्टम भारतीय वायुसेना को दिए गए 40 तेजस Mk1 लड़ाकू विमानों में लैस किए गए हैं। इसके अलावा, फ्रांस से मंगाए गए राफेल जेट में भी इजरायली सिस्टम लगाया जा सकता है।