
अमेरिका 1 अगस्त से लगभग 100 देशों से आने वाले सामानों पर 10% का टैरिफ लगाएगा, जिससे वैश्विक व्यापार नीति में बड़ा बदलाव आएगा। भारत के लिए स्थिति गंभीर है क्योंकि 9 जुलाई को 26% टैरिफ की छूट खत्म हो रही है और अगर समझौता नहीं हुआ तो निर्यात पर ज्यादा शुल्क लगेगा।
अमेरिका 1 अगस्त से लगभग 100 देशों से आने वाले सामानों पर 10% का टैरिफ लगाएगा। इसे वैश्विक व्यापार नीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यह टैरिफ उन देशों पर भी लागू होगा जो अभी अमेरिका के साथ बातचीत कर रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने 12 देशों को नए टैरिफ स्तरों की जानकारी देते हुए पत्र भेजे हैं। इसमें ‘लो या छोड़ दो’ का प्रस्ताव है। इस फैसले का मकसद अमेरिकी निर्यात के लिए बेहतर व्यापारिक शर्तें हासिल करना है। भारत पर इसका असर इसलिए भी जल्दी होगा क्योंकि भारतीय सामानों पर 26% टैरिफ की छूट 9 जुलाई को खत्म हो रही है। अगर तब तक कोई समझौता नहीं हुआ तो 1 अगस्त से भारतीय निर्यात पर ज्यादा शुल्क लगेगा।
अमेरिका अगले महीने से लगभग 100 देशों से आयात पर 10% का टैरिफ लगाने जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह वैश्विक व्यापार नीति में बड़ा बदलाव है। स्कॉट बेसेन्ट ने ब्लूमबर्ग टेलीविजन को बताया कि यह टैरिफ उन देशों पर भी लगेगा जो अभी अमेरिका के साथ बातचीत कर रहे हैं।
बेसेन्ट ने कहा, ‘हम देखेंगे कि राष्ट्रपति उन देशों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं जो बातचीत कर रहे हैं। क्या वे अच्छी नीयत से बातचीत कर रहे हैं या नहीं।’ उन्होंने यह भी कहा कि लगभग 100 देशों पर कम से कम 10% का टैरिफ लगेगा और आगे की स्थिति देखी जाएगी।
बड़े बदलाव की आहट – राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया है कि उन्होंने 12 देशों को पत्र भेजे हैं। इन पत्रों में नए टैरिफ के बारे में जानकारी दी गई है। यह एक ‘लो या छोड़ दो’ का प्रस्ताव है। हालांकि उन्होंने देशों के नाम नहीं बताए। लेकिन, कहा जा रहा है कि इसमें भारत, जापान और यूरोपीय संघ के सदस्य शामिल हैं।
अमेरिकी सरकार का कहना है कि इन टैरिफ का मकसद अमेरिकी निर्यात के लिए बेहतर व्यापारिक शर्तें हासिल करना है। लेकिन, इस नीति का दायरा बहुत बड़ा है। यह दुनिया के लगभग आधे देशों को लक्षित कर रही है। इसे दशकों में सबसे बड़ा व्यापारिक बदलाव माना जा रहा है।
भारत के लिए स्थिति गंभीर – भारत के लिए स्थिति थोड़ी गंभीर है। अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 26% टैरिफ की छूट दी थी। यह छूट 9 जुलाई को खत्म हो रही है। अगर तब तक कोई समझौता नहीं होता है तो 1 अगस्त से भारतीय निर्यात पर ज्यादा शुल्क लगेगा।
हाल के हफ्तों में बातचीत तेज हुई है। भारतीय वार्ताकार वाशिंगटन से बातचीत करके लौटे हैं। लेकिन, अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है। मुख्य मुद्दा यह है कि अमेरिका भारत पर अपने कृषि और डेयरी क्षेत्रों को जेनेटिकली मॉडिफाइड उत्पादों के लिए खोलने का दबाव डाल रहा है। इसका मतलब है कि अमेरिका चाहता है कि भारत अपने किसानों को ऐसे बीज और उत्पाद इस्तेमाल करने दे जिनमें बदलाव किया गया हो।
भारत चाहता है कि अमेरिका उसके श्रम-आधारित निर्यात जैसे कपड़ा, चमड़ा और रत्न के लिए ज्यादा अवसर दे। अमेरिका ने अभी तक किसी भी देश को स्टील टैरिफ में राहत नहीं दी है, जिसमें भारत भी शामिल है।
भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में जवाबी टैरिफ लगाने का अधिकार सुरक्षित रखा है। खासकर ऑटो पार्ट्स पर लगाए गए शुल्क के जवाब में। लेकिन, इसे सिर्फ एक प्रक्रिया माना जा रहा है। इसका सक्रिय बातचीत से कोई संबंध नहीं है।
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