
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के भारत विरोधी कदमों ने वॉशिंगटन और नई दिल्ली के 25 वर्षों में बने संबंधों को बहुत नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत को अमेरिका पर भरोसा करना चाहिए?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ हमले के बाद भारत और अमेरिका के रिश्ते नाजुक दौर में पहुंच गए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के ऊपर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है, जो ब्राजील के साथ दुनिया में सबसे ज्यादा है। ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25 प्रतिशत बेस टैरिफ लगाया है। इसके अलावा रूसी तेल खरीद के लिए 25 प्रतिशत का अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क भी लगाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप भारत के खिलाफ कदम उठाकर वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच 25 वर्षों में गहरे हुए रणनीतिक संबंधों को बर्बाद कर रहे हैं। इस मौजूदा तनाव से एक सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या अमेरिका पर भारत भरोसा कर सकता है?
भारत कैसे करे अमेरिका पर भरोसा? – यही सवाल सिंगापुर के पूर्व राजनयिक बिलाहारी कौशिकन से पूछा गया तो उन्होंने दिलचस्प जवाब दिया। कौशिकन से एक कार्यक्रम में पूछा गया कि क्या भारत दीर्घकालिक हितों के लिए अमेरिकी प्रशासन पर भरोसा कर सकता है। खासतौर पर जब पिछले कुछ समय से नई दिल्ली का बीजिंग के साथ तनाव चल रहा है। पाकिस्तान के साथ सैन्य संघर्ष हो चुका है और पड़ोसी बांग्लादेश के साथ भी रिश्ते ठीक नहीं चल रहे हैं।
बिलाहारी कौशिकन ने दिया जवाब – इसके जवाब में कौशिकन ने कहा कि ‘मुझे नहीं लगता कि भारत अमेरिका पर निर्भर है। आपने रणनीतिक कारणों से अमेरिका के से अमेरिका के साथ अपने रिश्ते बेहतर किए हैं। भारत का एक लंबा इतिहास है और आमतौर पर यह माना जाता है कि चीन के साथ आपके रिश्ते खराब नहीं है। आपके चीन के साथ रिश्ते तनावपूर्ण हैं, क्योंकि हिमालय में आपका विवाद है। इसकी वजह पुरानी चीनी कहावत है कि पहाड़ पर सिर्फ एक ही बाघ हो सकता है।’
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