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मई-जून में नॉर्वे, इटली, फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों की यात्रा पर जा सकते हैं PM मोदी, G7 समिट के लिए भी बुलावा


ईरान में युद्ध की वजह से मिडिल ईस्ट के हालात बेहद गंभीर बने हैं। इसका असर दुनिया के कई और देशों पर भी पड़ रहा। खास तौर पर ये देश पेट्रोल-डीजल, गैस समेत ऊर्जा संकट जूझ रहे हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है, हालांकि, अभी यहां हालात नियंत्रण में है। मध्य एशिया में जारी इन हालात के बीच केंद्र सरकार ने यूरोपीय देशों से रिश्तों को और मजबूत करने की कोशिशें तेज की है। जिस तरह से जनवरी में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता संपन्न हुआ, इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गर्मी में यूरोप महाद्वीप की दो यात्राओं की योजना बनाई है।
पीएम मोदी का यूरोप दौरा , जानें शेड्यूल – पीएम मोदी आगामी मई-जून महीने में नॉर्वे, इटली और फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों की यात्रा कर सकते हैं
प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरान भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए ओस्लो जाने की योजना है।
नॉर्वे के बाद मई के मध्य में इटली की द्विपक्षीय यात्रा करने की उम्मीद है
फ्रांस ने ऐलान किया है कि पीएम मोदी जून के मध्य में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जहां भारत को आमंत्रित किया गया है।
ये घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा जब पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हैं।
15 से 17 जून के बीच फ्रांस दौरा – फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने पीएम मोदी ने 15 से 17 जून तक होने वाले आगामी जी-7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित गेस्ट के रूप में अपनी भागीदारी की पुष्टि की है। पीएम मोदी ने 2019 के जी-7 शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लिया था, जिसकी मेजबानी फ्रांस ने की थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अपने फ्रांसीसी समकक्ष जीन-नोएल बैरोट से मुलाकात के बाद यह घोषणा की गई।
जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक – जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक गुरुवार को हुई। विज्ञप्ति में कहा गया कि मंत्रियों ने जी-7 के कार्यों में भारत के योगदान पर प्रकाश डाला। इसमें विशेष रूप से व्यापक आर्थिक असंतुलन के मुद्दे पर और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के साथ एकजुटता पर फोकस किया गया।
बैठक में ग्लोबल साउथ चैलेंज का जिक्र – फ्रांस में गुरुवार को जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक में बोलते हुए जयशंकर ने ऊर्जा चुनौतियों, उर्वरक आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा को लेकर ग्लोबल साउथ चैंलेज का जिक्र किया। भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन मूल रूप से पिछले साल निर्धारित था, लेकिन पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद इसे स्थगित करना पड़ा था।